भिवानी, 22 जुलाई
देश की राजधानी से उठी युवाओं के हकों की लपटें अब भिवानी की सडक़ों पर अंगारे बनकर धधक रही हैं। भाजपा की तानाशाही, घमंड और युवा विरोधी नीतियों के खिलाफ हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर बुधवार को भिवानी में कांग्रेस कार्यकर्ताओं का प्रचंड गुस्सा देखने को मिला। छात्रों और युवाओं के लोकतांत्रिक अधिकारों पर चलाए जा रहे दमनचक्र तथा राहुल गांधी समेत शीर्ष विपक्षी नेताओं को असंवैधानिक रूप से हिरासत में लिए जाने के विरोध में कांग्रेस ने शहर भर में उग्र प्रदर्शन किया और उपायुक्त के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा।
इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कांग्रेस के ग्रामीण जिला अध्यक्ष अनिरूद्ध चौधरी एवं शहरी जिला अध्यक्ष प्रदीप गुलिया जोगी ने किया। उनके नेतृत्व में युवा कांग्रेस, NSUI, महिला कांग्रेस, सेवा दल और कांग्रेस के सभी अग्रिम संगठनों के कार्यकर्ताओं का एक विशाल हुजूम सडक़ों पर उतरा। युवाओं के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ को लेकर कार्यकर्ताओं का रोष सातवें आसमान पर नजर आया।
लघु सचिवालय पर प्रदर्शनकारियों ने भाजपा सरकार पर तीखे हमले बोले। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने वाले 18-19 वर्ष तक के युवाओं पर बर्बरतापूर्ण लाठियां बरसाई गई, उससे स्पष्ट है कि भाजपा सरकार तानाशाही और अहंकार की पराकाष्ठा पार कर चुकी है। इसे देश के युवाओं के भविष्य और उनके सपनों की रत्ती भर भी परवाह नहीं है।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार पेपर लीक और भ्रष्टाचार का एक ऐसा जहरीला कॉकटेल तैयार कर रही है, जिसने लाखों होनहार युवाओं के भविष्य को अधर में लटका दिया है। भाजपा का स्पष्ट एजेंडा देश के युवाओं को अनपढ़ और बेरोजगार रखकर भारत को दशकों पीछे धकेलना है।
प्रधानमंत्री आवास के बाहर से नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और अन्य वरिष्ठ नेताओं को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की घटना पर अनिरूद्ध चौधरी एवं प्रदीप गुलिया जोगी का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने इस कार्रवाई की कड़े से कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि जब इस
कांग्रेस ने शहर भर में जोरदार नारेबाजी और प्रदर्शन करते हुए कांग्रेस का यह विशाल जत्था लघु सचिवालय पहुंचा, जहां उन्होंने राष्ट्रपति के नाम उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा।
कांग्रेस नेताओं ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि यदि युवाओं के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बंद नहीं हुआ, पेपर लीक के दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई और विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिशें तुरंत नहीं रुकीं तो यह आंदोलन और भी तेज किया जाएगा।
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