हरियाणा : हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के मीडिया सचिव रहे प्रवीण अत्रे को हटा दिया गया है. हरियाणा बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता के लिखित आदेश से इसकी पुष्टि हुई है कि प्रवीण अत्रे अब मुख्यमंत्री कार्यालय से दूर कर दिए गए है और हरियाणा बीजेपी के प्रदेश मीडिया संपर्क प्रमुख के तौर पर काम करेंगे.
चूंकि प्रवीण अत्रे को पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर का बेहद करीबी माना जाता है, इसीलिए मुख्यमंत्री सैनी के कार्यालय से हटाए जाने पर कई सियासी सवाल भी खड़े हो रहे हैं कि जिस प्रवीण अत्रे को मुख्यमंत्री कार्यालय में मीडिया प्रबंधन की जिम्मेदारी दी गई थी, उन्हें सरकार से हटाकर अचानक संगठन में क्यों भेजना पड़ा? क्या सीएम सैनी की छवि चमकाने में नाकाम रहने पर अत्रे के खिलाफ एक्शन किया गया है?
कहा जा रहा है कि मीडिया के एक बड़े हिस्से में प्रवीण अत्रे की कार्यशैली को लेकर भारी नाराज़गी थी। कुछ पत्रकारों द्वारा बीजेपी नेतृत्व से शिकायत किए जाने के दावे भी सामने आ रहे हैं। आरोप लगाया गया कि मीडिया से मिलने वाला पूरा फीडबैक मुख्यमंत्री तक नहीं पहुंचाया जाता था और कई मामलों में उन्हें आधी-अधूरी जानकारी दी जाती थी। सबसे गंभीर सवाल सरकारी विज्ञापनों के वितरण से जुड़े कथित आरोपों पर हैं। आरोप हैं कि कुछ चुनिंदा मीडिया संस्थानों को अधिक विज्ञापन दिलाने का प्रयास हुआ, जबकि कई अखबारों और समाचार चैनलों की उपेक्षा की गई।
हालांकि गरम होती सियासी अटकलों के बीच, हरियाणा बीजेपी ने अत्रे को सरकार से हटा कर संगठन में दी गई नई ज़िम्मेदारी को सामान्य संगठनात्मक फेरबदल बता कर पल्ला झाड़ लिया है. मगर ये सवाल मुंह बाए खड़ा है कि बेहद ताकतवर माने जाने वाले प्रवीण अत्रे की मुख्यमंत्री कार्यालय से विदाई के पीछे का असली कारण क्या है?
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