Panipat Blackmailing Case:
आसाराम बापू केस के मुख्य गवाह रहे महेंद्र चावला को कुल 5 दिन के रिमांड के बाद पुलिस ने शनिवार को उसे फिर से कोर्ट में पेश किया। जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। जानकारी देते हुए डीएसपी मुख्यालय सतीश वत्स ने बताया कि दो दिन के और रिमांड के दौरान महेंद्र चावला से ब्लैकमेल कर हड़पी गई राशि से 10 लाख रुपए और बरामद हुए हैं।
भतीजा अंडरग्राउंड:
रिमांड के दौरान पुलिस टीम ने महेंद्र के भतीजे के संभावित ठिकानों पर रेड़ की, लेकिन उसे महेंद्र की गिरफ्तारी होने का पता लगने के कारण वह अंडरग्राउंड हो गया है। उसका भतीजा पुलिस के हाथ नहीं लगा। आज शनिवार को महेंद्र को फिर से कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे कोर्ट के आदेशों पर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। पुलिस मामले की आगामी कार्रवाई में जुटी हुई है।
सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल ने खोली पोल
मामले से जुड़ा एक CCTV भी सामने आया है। जिसमें महेंद्र का भाई देवेंद्र मीडिएटर पूर्ण शर्मा के घर से 70 लाख रुपए से भरा बैग ले जाता दिख रहा है। पुलिस ने महेंद्र चावला का मोबाइल फोन और उसकी कार को मौके पर ही जब्त कर लिया है। फोन को सील कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है, ताकि ब्लैकमेलिंग के अन्य सबूत जुटाए जा सकें।
आरटीआई को बनाया ब्लैकमेलिंग का हथियार
अदालत में यह भी दलील दी गई कि आरोपी महेंद्र चावला का पुराना इतिहास आरटीआई (RTI) लगाकर पब्लिक सर्वेंट और रसूखदार लोगों को ब्लैकमेल करने का रहा है। इसी पैटर्न पर उसने सरपंच से गवाही बदलने के नाम पर ₹70 लाख हड़पे और फिर ₹80 लाख की और मांग की।
जानिए महेंद्र ने कैसे ठगे ₹70 लाख
महेंद्र की मां भी केस में शामिल: इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत दिसंबर 2025 में हुई। शिकायतकर्ता भगत सिंह के अनुसार, महेंद्र और सनौली गांव के सरपंच संजय त्यागी का कोई कोर्ट केस चल रहा है। इसी को लेकर महेंद्र की मां गोपाली देवी उनके पास आई। उन्होंने कहा कि हमारे मुकदमे में करीब एक करोड़ रुपए खर्च हो गए हैं।
स्टाम्प पेपर पर साइन कराए:
भगत सिंह के अनुसार, गोपाली देवी ने कहा- अगर वो सरपंच संजय से उन्हें ये रुपए दिला दे तो वे कोर्ट में संजय के पक्ष में गवाही दे देंगे। इसके बाद भगत सिंह ने सरपंच संजय से संपर्क करना शुरू किया। महेंद्र का पूर्व सरपंच सुरेंद्र शर्मा के साथ भी एक केस चल रहा है। इस केस में उसने सुरेंद्र के खिलाफ दर्ज FIR में समझौते के लिए 101 रुपए के स्टाम्प पेपर पर साइन कर दिए।
मीडिएटर के घर से 70 लाख लिए:
भगत सिंह ने बताया कि इन केस में समझौता करने के बदले महेंद्र को 1 मार्च को 70 लाख रुपए दिए। महेंद्र का भाई देवेंद्र और उसका बेटा राम इन रुपयों को एक मीडिएटर के घर से ले गया। जिसकी सीसीटीवी फुटेज हमने पुलिस को सौंप दी है।
80 लाख की अतिरिक्त मांग:
गिरफ्तारी वारंट के बाद 16 मार्च की रात महेंद्र मीडिएटर के घर पहुंचा। वहां उसने कहा कि सरपंच संजय त्यागी से पंचायत में एक प्रस्ताव पेश करवाया जाए, जिसमें दुकान गिराने का ऑर्डर दिया जाए। हालांकि यह सामने नहीं आया कि महेंद्र ये दुकानें क्यों गिरवाना चाहता था।
अगले दिन प्रस्ताव पेश हुआ:
भगत सिंह ने बताया कि अगले ही दिन पंचायत से ये प्रस्ताव पास हो गया, लेकिन इसके बाद महेंद्र ने 18 मार्च को 80 लाख रुपए और देने की डिमांड की। धमकी दी कि अगर ये पैसे नहीं मिले तो कोर्ट में वह झूठी गवाही देगा। उसने कहा कि सरपंच करोड़पति है, 80 लाख रुपए देना उसके लिए बड़ी बात नहीं है।
कोर्ट में फिर बदली गवाही:
भगत सिंह ने आगे बताया कि हमने महेंद्र 80 लाख रुपए देने से मना कर दिया। इसके बाद उसने 19 मार्च को कोर्ट में अपनी पुरानी गवाही बदलकर सबके खिलाफ बयान दे दिया।
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