Shimla: हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले में शराब का ठेका खोलने के विरोध में एक पंचायत ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया. लगातार ठेके खिलाफ महिला और पुरुष ठेके के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे. लेकिन सुक्खू सरकार ने उनकी बात नहीं सुनी तो नाराज होकर इस्तीफा दे दिया.
चेवड़ी पंचायत के सभी पदाधिकारियों ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया है, जिसमें पंचायत प्रधान, उप प्रधान और वार्ड मेंबर शामिल हैं। उनका आरोप है कि सरकार ने उनके गांव में शराब का ठेका खोल दिया है, जिससे माहौल बिगड़ रहा है. प्रदर्शनकारी महिलाओं के खिलाफ केस दर्ज होने के बाद 12 दिन की हड़ताल के बाद उन्होंने यह कदम उठाया है.
पंचायत प्रधान छविंद्र सिंह पाल ने कहा कि इस दौरान ठेका बंद करने की मांग विभिन्न स्तर पर उठाते रहे, लेकिन उनकी मांग मानने के बजाय हड़ताल करने वाली महिलाओं पर उल्टा एफआईआर की गई. इससे नाराज होकर सभी ने अपने पद से इस्तीफा देने का निर्णय लिया. छविंद्र सिंह पाल ने कहा कि सरकार एक तरफ नशा मुक्ति की बात करती है और दूसरी तरफ जो पंचायतें नशे के खिलाफ आवाज उठा रही हैं, उन पर एफआईआर की जाती है. इसे देखते हुए उन्होंने नैतिक आधार पर इस्तीफा देने का फैसला लिया है.
उन्होंने बताया कि 11 दिन से आंदोलन चल रहा था. अब तक सरकार ने उनकी बात नहीं सुनी. कैबिनेट मंत्री विक्रमादित्य सिंह से भी मुलाकात की थी. लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. प्रधान ने कहा कि उन्होंने आबकारी विभाग से भी मेल के जरिये संपर्क किया था. एसडीएम से भी बात की गई थी. प्रधान ने कहा कि पुलिस ने महिलाओं के खिलाफ केस दर्ज किया गया है. ऐसे में उन्होंने ग्राम सभा में चर्चा के बाद पूरी पंचायत ने इस्तीफा सौंपा है. अब पंचायत की तरफ से सरकार को तीन दिन का अल्टीमेटम दिया है.
गौरतलब है कि गांव के पास ही बिजली विभाग का एक प्रोजेक्ट चल रहा है और इसमें बड़ी संख्या में बाहरी लोग काम करते हैं. ये लोग शराब खरीदने के लिए आते हैं और ऐसे में महिलाओं को आशंका है कि गांव का माहौल खराब होगा और इसी वजह से विरोध हो रहा है.
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