HC on Sanjeev Arora Arrest
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में आज पंजाब के कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा द्वारा ED की गिरफ्तारी के खिलाफ दायर याचिका पर एक अहम सुनवाई हुई। अरोड़ा की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील पुनीत बाली ने कोर्ट में ED के कामकाज और गिरफ्तारी की प्रक्रिया को लेकर कई गंभीर मुद्दे उठाए। उन्होंने FIR को गुप्त रखने का आरोप लगाया। वकील पुनीत बाली ने कोर्ट को बताया कि संजीव अरोड़ा के खिलाफ 19 अप्रैल को FIR दर्ज की गई थी, लेकिन कल (11 मई) तक इसे सार्वजनिक नहीं किया गया था।
निष्पक्ष जांच के सिद्धांतों के खिलाफ
याचिका में पहले ही यह कहा गया था कि याचिकाकर्ता को FIR की एक प्रति उपलब्ध नहीं कराई गई थी। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि इस मामले में ED ही शिकायतकर्ता है और ED ही खुद जांच कर रही है, जो निष्पक्ष जांच के सिद्धांतों के खिलाफ है। कोर्ट को यह भी सूचित किया कि याचिकाकर्ता को हिरासत के दौरान ‘पावर ऑफ अटॉर्नी’ (वकालतनामा) पर हस्ताक्षर करने की भी अनुमति नहीं दी गई थी। इस वजह से, यह याचिका उनके बेटे काव्य अरोड़ा के माध्यम से दायर करनी पड़ी।
संजीव अरोड़ा की गिरफ्तारी पूर्व-नियोजित
वकील ने स्पष्ट किया कि अरोड़ा की फर्म (HSRL) ने मोबाइल फोन की खरीद के लिए सभी भुगतान चेक के माध्यम से किए थे और नियमों के अनुसार GST का भुगतान भी किया गया था। याचिका में पहले ही यह दावा किया गया है कि संजीव अरोड़ा की गिरफ्तारी पूर्व-नियोजित थी। दस्तावेजों के अनुसार, जांच अधिकारी ने दोपहर 3:25 बजे अरोड़ा का बयान पढ़ना शुरू किया और उन्हें ठीक 35 मिनट बाद, शाम 4:00 बजे गिरफ्तार कर लिया गया। बचाव पक्ष का कहना है कि इतने कम समय में 17 पृष्ठों का एक जटिल ‘गिरफ्तारी का आधार’ (grounds of arrest) तैयार करना संभव नहीं है।
अन्य ख़बरें जानें-
Begowal Murder: बेगोवाल में दिन-दहाड़े युवक की हत्या
अन्य अपड़ेट के लिए जुड़े रहिए LIVING INDIA NEWS के साथ 24/7 LIVE



