पलवल, 12 जुलाई
हरियाणा सरकार के जन-जागरूकता अभियान के तहत जिला अग्निशमन विभाग द्वारा पलवल के रसूलपुर चौक स्थित मित्तल क्लासेस एवं आकाश इंस्टीट्यूट में फायर सेफ्टी अवेयरनेस कार्यक्रम एवं मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व अग्निशमन विभाग पलवल के सब फायर ऑफिसर नवीन पाल ने किया। इस दौरान संस्थान के प्रबंधन, शिक्षकों एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने भाग लेकर अग्नि सुरक्षा संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सब फायर ऑफिसर नवीन पाल ने विद्यार्थियों को बताया कि किसी भी आग के लगने के लिए तीन तत्व आवश्यक होते हैं-ईंधन, ऑक्सीजन और ताप। इन तीनों तत्वों के मिलकर बनने वाले फायर ट्रायंगल के कारण आग उत्पन्न होती है। यदि इनमें से किसी एक तत्व को अलग कर दिया जाए तो आग स्वत: बुझ जाती है। उन्होंने कहा कि आग बुझाने का मूल सिद्धांत इसी फायर ट्रायंगल को तोडऩा है।
उन्होंने विद्यार्थियों को आग के विभिन्न प्रकारों की जानकारी देते हुए बताया कि भारतीय मानकों के अनुसार आग को क्लास ए, बी, सी, डी तथा एफ श्रेणियों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक प्रकार की आग के लिए अलग-अलग प्रकार के अग्निशामक यंत्रों का प्रयोग किया जाता है। इसलिए बिना जानकारी के किसी भी आग पर पानी या अन्य माध्यम का उपयोग नहीं करना चाहिए।
मॉक ड्रिल के दौरान विद्यार्थियों को अग्निशामक यंत्र का सुरक्षित एवं प्रभावी उपयोग भी सिखाया गया। उन्होंने बताया कि अग्निशामक यंत्र का प्रयोग करने से पहले उसका प्रेशर गेज अवश्य जांचना चाहिए। यदि सूई ग्रीन जोन में है तो यंत्र उपयोग के लिए उपयुक्त माना जाता है। इसके बाद पास तकनीक के माध्यम से अग्निशामक यंत्र चलाने का व्यावहारिक प्रदर्शन किया गया।
उन्होंने बताया कि आग लगने की घटनाओं में सबसे अधिक खतरा धुएं से होता है, क्योंकि धुएं में मौजूद विषैली गैसें सांस के माध्यम से शरीर में पहुंचकर गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसलिए आग लगने की स्थिति में घबराने के बजाय सुरक्षित निकास मार्ग अपनाना चाहिए तथा धुएं से बचाव के उपायों का पालन करना चाहिए।
भूकंप जैसी आपदा के दौरान अपनाई जाने वाली सावधानियों पर प्रकाश डालते हुए नवीन पाल ने विद्यार्थियों को ड्रॉप, कवर एंड होल्ड तकनीक की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भूकंप आने पर घबराकर सीढ़ियों की ओर भागने के बजाय किसी मजबूत मेज अथवा भवन के मजबूत हिस्से के नीचे या पास बैठकर अपने सिर एवं शरीर को सुरक्षित रखें और झटके समाप्त होने तक वहीं बने रहें।
कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को अग्नि सुरक्षा के प्रति सदैव सतर्क रहने, नियमित मॉक ड्रिल आयोजित करने तथा संस्थानों में सभी आवश्यक फायर सेफ्टी मानकों का पालन सुनिश्चित करने का आह्वान किया गया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक शैक्षणिक संस्थान को समय-समय पर आंतरिक फायर सेफ्टी अभ्यास आयोजित कर विद्यार्थियों एवं स्टाफ को आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए प्रशिक्षित करना चाहिए।
उन्होंने बताया कि मॉक ड्रिल करने का उद्देश्य लोगों को यह सिखाना होता है कि खतरे के समय उन्हें बिना घबराए सुरक्षित स्थानों तक कैसे पहुंचना है। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों से अपील करते हुए कहा कि फायर एनओसी लें और कानून का पालन करें ताकि भविष्य में कोई भी अप्रिय घटना घटित होने से रोका जा सके।
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