भिवानी, 3 अगस्त
कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए महिला डिस्कस थ्रो में कांस्य पदक जीतने वाली भिवानी की बेटी सीमा कालीरामन का अपने गृह जिले में भव्य स्वागत किया गया। ढोल-नगाड़ों, फूल-मालाओं और जयघोष के बीच सीमा का अभिनंदन हुआ। इस दौरान सीमा ने अपनी सफलता, संघर्ष, परिवार के सहयोग और भविष्य के लक्ष्यों को लेकर खुलकर बातचीत की।भिवानी पहुंचने पर सीमा कालीरामन ने कहा कि जिस तरह लोगों ने उनका स्वागत किया है, उसे देखकर वह बेहद भावुक हैं। उन्होंने कहा कि केवल जान-पहचान के लोग ही नहीं, बल्कि पूरा शहर और पूरा देश उनकी इस उपलब्धि से खुश है।
सीमा ने कहा कि अब तक भिवानी की पहचान बॉक्सिंग के लिए रही है, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि उनके पदक के बाद एथलेटिक्स और खासकर डिस्कस थ्रो के प्रति भी युवाओं का रुझान बढ़ेगा।सीमा कालीरामन ने कहा कि पहले भिवानी में बॉक्सिंग का क्रेज था, लेकिन अब डिस्कस में मेडल आया है तो उम्मीद है कि एथलेटिक्स का भी क्रेज देखने को मिलेगा।सीमा का कहना है कि उनकी सबसे बड़ी इच्छा यही है कि आने वाले समय में नई पीढ़ी उनसे प्रेरणा लेकर खेलों में आगे बढ़े और देश के लिए पदक जीते।
सीमा कालीरामन ने कहा कि कोशिश यही रहती है कि मुझसे प्रेरित होकर बच्चे डिस्कस थ्रो में आएं और अच्छा करें। आगे चलकर अगर कोई खिलाड़ी कहे कि मैं सीमा दीदी से प्रेरित होकर खेल में आई हूं, तो इससे बड़ी खुशी मेरे लिए नहीं होगी।
अपनी सफलता के पीछे के संघर्ष को याद करते हुए सीमा ने कहा कि हर खिलाड़ी के जीवन में कठिनाइयाँ आती हैं। चोट, आर्थिक समस्याएँ और कई चुनौतियाँ होती हैं, लेकिन मेहनत और धैर्य ही सफलता दिलाते हैं।सीमा कालीरामन हर खिलाड़ी के जीवन में संघर्ष होता है। कभी इंजरी आती है, कभी आर्थिक परेशानियाँ होती हैं। खिलाड़ी का जीवन कभी आसान नहीं होता। जो संघर्ष से ऊपर उठकर मेहनत करता है, उसी को उसका फल मिलता है।
सीमा ने अपनी सफलता का श्रेय परिवार को देते हुए कहा कि उनके बेटे को मात्र 11 महीने की उम्र में परिवार के भरोसे छोड़कर उन्हें अभ्यास के लिए जाना पड़ा। परिवार के सहयोग के बिना यह उपलब्धि संभव नहीं थी।सीमा कालीरामन ने कहा कि मेरे परिवार का पूरा सहयोग रहा। बेटे को 11 महीने की उम्र में घर पर छोड़ना पड़ा। वह नाना-नानी और दादा-दादी के पास रहा। परिवार के इसी सहयोग की वजह से मैं आज यहां तक पहुंची हूं।
वहीं सीमा के पति एवं कोच रविंदर अब हमारा अगला लक्ष्य एशियन गेम्स है। उसके बाद एल.ए. ओलंपिक की तैयारी जारी रहेगी। यह उपलब्धि ओलंपिक की दिशा में एक मजबूत शुरुआत है।
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