दिल्ली, 3 अगस्त
सुप्रीम कोर्ट आज 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस बर्बरता और बल प्रयोग से जुड़े मामले में सुनवाई करेगा।मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष इस मामले से जुड़ी विभिन्न याचिकाएं सूचीबद्ध हैं। याचिकाओं में प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज, पैलेट गन के इस्तेमाल और पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
इससे पहले 28 जुलाई को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ राज्यों को कोई कठोर कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया था। अदालत ने यह भी कहा था कि जिन प्रदर्शनकारियों की उम्र 18 वर्ष से कम है और जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उन्हें रिहा किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र, बिहार, असम, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और केरल सरकारों को नोटिस जारी कर उनके एडवोकेट जनरल को अगली सुनवाई में ऑनलाइन उपस्थित होने के निर्देश दिए थे। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को CCTV फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग, बॉडी कैमरा फुटेज, वायरलेस संचार रिकॉर्ड, PCR लॉग और विरोध प्रदर्शन से जुड़े सभी डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का आदेश भी दिया था।
बता दें कि परीक्षाओं में गड़बड़ी और NEET पेपर लीक के विरोध में ‘कॉकरोच जनता पार्टी‘ के नेतृत्व में दिल्ली में 36 दिनों तक प्रदर्शन चला था। 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़प हुई थी। संसद की ओर बढ़ रही भीड़ को रोकने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले दागे थे। प्रदर्शनकारी तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। 25 जुलाई को उनके इस्तीफे और मृत छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने की मांग स्वीकार किए जाने के बाद आंदोलन समाप्त कर दिया गया था।
इस मामले में राज्यसभा सांसद एए रहीम ने भी सुप्रीम कोर्ट में अलग याचिका दायर की है। याचिका में प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा फेसियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी (FRT) और अन्य बायोमेट्रिक निगरानी प्रणालियों के इस्तेमाल को चुनौती देते हुए शांतिपूर्ण सार्वजनिक सभाओं में इस तरह की निगरानी को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट की आज की सुनवाई से इस मामले में आगे की दिशा तय होने की उम्मीद है।
अन्य खबरें जानें –



