BHIWANI की मासूम सिया ज़िंदगी और मौत की जंग में, 9 करोड का ‘जोल्जेंस्मा’ इंजेक्शन, 2 महीने का वक्त बाकी

भिवानी 2 जुलाई हरियाणा के भिवानी की एक ऐसी मासूम  जिसकी ज़िंदगी की डोर वक्त और भारी-भरकम रकम के बीच झूल रही है। भिवानी के…

भिवानी
भिवानी 2 जुलाई

हरियाणा के भिवानी की एक ऐसी मासूम  जिसकी ज़िंदगी की डोर वक्त और भारी-भरकम रकम के बीच झूल रही है। भिवानी के विद्यानगर की रहने वाली मात्र 19 महीने की मासूम बेटी सिया एक बेहद ही दुर्लभ और गंभीर बीमारी से जूझ रही है।इस बीमारी का नाम है— SMA (स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी) टाइप-1। इस मासूम को बचाने के लिए एक इंजेक्शन की जरूरत है, जिसकी कीमत सुनकर किसी के भी होश उड़ जाएं। टैक्स छूट के बाद भी भारत में इस ‘जोल्जेंस्मा’ (Zolgensma) इंजेक्शन की कीमत करीब 9 करोड़ रुपए है। मासूम सिया के पास सिर्फ 2 महीने बचे हैं।सिया की मां भावुक होते हुए अपील करी है कि “मेरी बेटी को बचा लो”। ₹9 करोड़ के ‘जोल्जेंस्मा’ इंजेक्शन के लिए बेबस माता-पिता ने सरकार-जनता से मदद मांगी है। इस इंजेक्शन के कारण ही सिया की जिंदगी बच सकती है। सिया के  पिता ने अपनी  मासूम बेटी को बचाने के लिए महा-अभियान की अपील की है। एम्स के अस्पताल ने भी मासूम को बचाने के लिए स्कैनर जारी किया है।

एक ऐसा परिवार जो किराए की दुकान चलाकर बमुश्किल गुजारा करता है, उसके लिए यह रकम किसी पहाड़ जैसी है।सिया जब 6 महीने की थी, तब उसे निमोनिया हुआ था। कई अस्पतालों के चक्कर काटने के बाद जब हालत नहीं सुधरी, तो न्यूरोलॉजिस्ट की सलाह पर जेनेटिक जांच करवाई गई। रिपोर्ट आई तो माता-पिता के पैरों तले जमीन खिसक गई। सिया को SMA टाइप-1 था। डॉक्टरों के मुताबिक, यह इंजेक्शन 2 साल की उम्र से पहले लगना सबसे ज्यादा असरदार होता है। यानी मासूम सिया के पास अब सिर्फ 2 महीने का वक्त बचा है।सिया की हालत लगातार बिगड़ रही है। वह न ठीक से बैठ पाती है, न अपने शरीर को संभाल पाती है। अचानक ऑक्सीजन का लेवल गिर जाता है और सांसें थमने लगती हैं, जिसके बाद उसे तुरंत अस्पताल भागना पड़ता है।

मां नीतू का ने बताया कि आजकल समाज में फ्रॉड बहुत बढ़ गए हैं, जिसकी वजह से असल जरूरतमंदों को मदद नहीं मिल पाती। मेरी आप सब से हाथ जोड़कर प्रार्थना है कि मेरी बेटी को बचा लीजिए। जो भी संभव हो, आर्थिक मदद करें। मैं सरकार से भी अपील करती हूं कि ऐसी गंभीर बीमारियों के लिए एक विशेष कोष (फंड) बनाया जाए, ताकि किसी गरीब की औलाद इलाज के बिना न मरे।”जी हां, मां का दर्द बिल्कुल जायज है। आज एक बेबस मां अपनी 19 महीने की कलेजे के टुकड़े के लिए सरकार और देश की जनता के सामने झोली फैलाकर खड़ी है। 9 करोड़ रुपए एक परिवार के लिए असंभव हो सकते हैं, लेकिन अगर देश की जनता और सरकार ठान ले, तो इस मासूम को एक नई ज़िंदगी मिल सकती है।

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