नूंह, 13 अगस्त
नूंह जिला मुख्यालय से करीब चार किलोमीटर की दूरी और गुरुग्राम-अलवर मार्ग के किनारे बसा गांधी ग्राम घासेड़ा इन दिनों रास्तों में जलभराव और कीचड़ से जूझ रहा है। सबसे अधिक समस्या तबेले मोहल्ले की है, जहां मुख्य रास्ते में इतना अधिक पानी भरा हुआ है कि लोगों का निकलना मुश्किल हो रहा है।
कागजों में गांव को विकास और स्वच्छता की मिसाल के तौर पर पेश किए जाने के बावजूद धरातल पर तस्वीर इसकी उलट दिखाई दे रही है। बारिश के बाद गांव की गलियों और रास्तों में जगह-जगह जलभराव है, नालियां गंदगी से भरी पड़ी हैं और कीचड़ के कारण लोगों का घरों से निकलना तक मुश्किल हो गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि रास्तों की बदहाली कोई नई समस्या नहीं है, बल्कि लंबे समय से लोग इसी परेशानी से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि उनके गांव घासेड़ा की पहचान केवल एक सामान्य गांव के रूप में नहीं, बल्कि गांधी ग्राम के रूप में होती है।
गांव का संबंध महात्मा गांधी की ऐतिहासिक यात्रा से जुड़ा हुआ है। इसी वजह से स्वच्छता और सामाजिक बदलाव के संदर्भ में घासेड़ा का नाम अक्सर लिया जाता है। लेकिन वर्तमान हालात गांव की उस पहचान पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि जिस गांव से जिले में स्वच्छता अभियान की शुरुआत किए जाने की बात कही जाती है, उसी गांव में आज जलभराव, बंद नालियां और कीचड़ लोगों के लिए परेशानी बनी हुई हैं।
वही अतिरिक्त उपायुक्त ज्योति ने बताया कि जलभराव की समस्या को लेकर टीमे लगी हुई हैं, शहर ग्रामीण इलाकों से पानी निकालने का प्रयास किया जा रहा है।
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