President Approval For VB-G-RAM-G Bill:
राष्ट्रपति ने विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-G-RAM-G Bill) बिल, 2025 को मंजूरी दे दी है. अब यह विधेयक कानून बन गया है. इस कानून के तहत ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 125 दिन मिलेगा. सरकार का कहना है कि वीबी-जी राम जी कानून लागू होने से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की कानूनी गारंटी पहले से ज्यादा मजबूत हो जाएगी. इसके अलावा राज्य सरकार 60 दिन के लिए काम रोक सकते है.
VB-G-RAM-G Bill महिलाओं, कमजोर वर्गों और जरूरतमंद के लिए भूमिका निभाएगा कानून-
इस कानून के मुताबिक अब 125 दिन तक मजदूरी आधारित काम उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी होगी. सरकार का कहना है कि नए कानून (VB-G-RAM-G Bill) के तहत समावेशी विकास को प्राथमिकता दी गई है, ताकि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों तक योजनाओं का लाभ पहुंचे. सरकार का दावा है कि यह कानून महिलाओं, कमजोर वर्गों और जरूरतमंद परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभाएगा. इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थायी मजबूती मिलेगी.
60 दिन के लिए काम रोकने का अधिकार राज्य सरकार के पासृ-
राज्य सरकारें तय कर सकती हैं कि किस अवधि में बुवाई और कटाई का ध्यान रखते हुए VB-G-RAM-G Bill के तहत 60 दिन के लिए काम रोकना है. ऐसे में किसानों को अपने खेतों पर काम करने के लिए मजदूरों की कमी नहीं पड़ेगी. खासकर पीक सीजन के दौरान. इससे मजदूरों को भी मनरेगा के काम से अतिरिक्त अपने लिए बाकी स्रोतों से वेतन जुटाने में मदद मिलेगी. किसानों के लिए मजदूर सही स्तर पर उपलब्ध रहेंगे, ऐसे में उन्हें अतिरिक्त वेतन पर मजदूरों को नहीं रखना होगा.
सिर्फ नाम हटाने के लिए बिल लाई सरकार – विपक्ष
इस बिल पर देत रात तक संसद में चर्चा चली थी. इस मामले में विपक्ष का कहना था कि सरकार जानबूझकर मनरेगा का नाम बदल रही है. मनरेगा में महात्मा गांधी का भी नाम आता था.भाजपा इस नाम को हटाने के लिए ये बिल लाई. इस बहस के दौरान ही कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने भाजपा पर जमकर हमला बोला था. उन्होंने कहा था कि जब भी कांग्रेस सत्ता में आएगी, तो वो इसका फिर नाम बदलेंगे. इन सब हंगामों के बीच इस बिल को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया था. हालांकि संसद में विपक्ष ने इस बिल का पुरजोर विरोध किया था. इतना ही नहीं, इसके बाद विपक्ष ने संविधान सदन के बाहर पूरी रात धरना भी दिया था. इसके अलावा कांग्रेस और अन्य पार्टियों के संहयोगियों ने अलग- अलग राज्यों में भी इसका विरोध किया.
2047 में विकसित भारत के लक्ष्य के तहत योजनाएं तैयार करेंगें-
वीबी-जी राम जी कानून में संतृप्ति आधारित डिलीवरी को खास महत्व दिया गया है. इसका मतलब यह है कि कोई भी पात्र परिवार योजना के लाभ से वंचित न रहे. कानून में दी गई जानकारी के मुताबिक, इस तरह गांवों के लिए एकीकृत ढांचा तैयार करने से देशभर में उत्पादक, टिकाऊ, सुदृढ़ और बदलाव में सक्षम ग्रामीण परिसंपत्तियों (एसेट्स) का निर्माण सुनिश्चित होगा. केंद्र और राज्य 2047 में विकसित भारत के लक्ष्य के तहत इन परिसंपत्तियों को आगे बढ़ाने की योजनाएं भी साझा तौर पर तैयार करेंगी. यानी एक राष्ट्रीय नीति के तहत काम के बिखराव को समेटा जाएगा और तय दिशा में इसे आगे बढ़ाया जाएगा.
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