शिमला, 3 सितंबर
हिमाचल प्रदेश विधानसभा में ‘हिमाचल प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026’ पारित कर दिया गया। इस विधेयक के माध्यम से प्रदेश के छह राज्य विश्वविद्यालयों से जुड़े कानूनों में संशोधन किए गए हैं। संशोधन में विश्वविद्यालयों के वित्तीय मामलों, नियुक्तियों, पद सृजन, पदोन्नति और वेतन-भत्तों को लेकर कई अहम प्रावधान किए गए हैं।
संशोधन विधेयक पारित होने के बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालयों में वित्तीय फैसलों पर सरकार की निगरानी बढ़ेगी। वित्त समिति में वित्त विभाग की अहम भूमिका होगी। विश्वविद्यालयों में भर्ती, पद सृजन, पदोन्नति और वेतन-भत्तों से जुड़े मामलों पर पहले वित्त समिति विचार करेगी। उन्होंने कहा कि नए संशोधन से भर्ती में पारदर्शिता आएगी।
शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों की भर्ती के लिए चयन समितियों का गठन किया जाएगा और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा। कुलपति विश्वविद्यालय का प्रमुख कार्यकारी एवं शैक्षणिक अधिकारी होगा और विश्वविद्यालय के कामकाज पर निगरानी रखेगा। आपात स्थिति में कुलपति को तत्काल निर्णय लेने की शक्ति होगी, लेकिन बाद में सक्षम प्राधिकारी से इसकी मंजूरी लेना जरूरी होगा।
विधेयक के तहत कार्यकारी परिषद सामान्य प्रशासन और संपत्ति से जुड़े मामलों की जिम्मेदारी संभालेगी। वहीं वित्त समिति विश्वविद्यालय के बजट, खातों और ऑडिट रिपोर्ट की जांच कर बोर्ड को सलाह देगी।वित्त समिति और कार्यकारी परिषद में मतभेद होने की स्थिति में मामला कुलाधिपति के पास जाएगा। राज्य सरकार से सलाह के बाद कुलाधिपति का फैसला अंतिम होगा। संशोधन का उद्देश्य विश्वविद्यालयों में वित्तीय अनुशासन और जवाबदेही को मजबूत करना है।
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