दिल्ली, 11 अगस्त
12 अगस्त को साल 2026 का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार यह पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा।पंचाग के अनुसार सूर्य ग्रहण श्रावण मास की अमावस्या को लगेगा। भारतीय समय के अनुसार ग्रहण की शरूआत, 12 अगस्त की रात 9 बजकर 4 मिनट पर होगी औऱ समापन 13 अगस्त की सुबह 4 बजकर 25 मिनट पर होगी।
भारत में नहीं दिखाई देगा ग्रहण
यह पूर्ण सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। ग्रहण यूरोप के अधिकांश हिस्सों, उत्तर-पश्चिमी अफ्रीका, कनाडा और रूस के उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में देखा जा सकेगा। ग्रहण का पूर्ण रूप आर्कटिक, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, अटलांटिक महासागर, उत्तरी स्पेन और पुर्तगाल के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा। वहीं ब्रिटेन, फ्रांस, इटली समेत यूरोप के कई देशों में इसका आंशिक रूप नजर आएगा।
भारत में सूतक काल मान्य होगा या नहीं?
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, सूतक काल उस स्थान पर मान्य माना जाता है जहां ग्रहण दिखाई देता है। चूंकि 12 अगस्त का सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, भारतीय समय के अनुसार सूतक काल की शुरुआत 12 अगस्त की सुबह 9 बजकर 4 मिनट से मानी जा रही है, लेकिन भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देने के कारण मंदिरों में पूजा-पाठ और सामान्य धार्मिक गतिविधियों पर रोक नहीं होगी।
अमावस्या होने के कारण इस दिन पितरों के नाम से दान-पुण्य करने और कुल देवी-देवताओं के मंत्रों का जाप करने को भी शुभ माना गया है।
सूर्य ग्रहण के समय बनेंगे कई योग
ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस सूर्य ग्रहण के दौरान कर्क राशि में सूर्य, बुध, गुरु और चंद्रमा की स्थिति से चतुर्ग्रही योग बनने की बात कही जा रही है। इसके अलावा सूर्य और बुध की युति से बुधादित्य योग तथा गुरु-चंद्रमा की युति से गजकेसरी योग बनने का भी उल्लेख किया गया है।
ज्योतिष में ग्रहों की इन स्थितियों को महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इन योगों का प्रभाव सभी 12 राशियों पर अलग-अलग पड़ सकता है। कुछ राशियों के जातकों को करियर, धन और नए अवसरों में लाभ मिल सकता है, जबकि कुछ राशियों को स्वास्थ्य, धन और निर्णयों के मामले में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
अगस्त में लगेंगे दो ग्रहण
अगस्त 2026 में एक नहीं, बल्कि दो ग्रहण लगने वाले हैं। इनमें पहला सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को होगा, जबकि इसके बाद चंद्र ग्रहण भी लगेगा। ज्योतिषीय दृष्टि से लगातार पड़ने वाले इन ग्रहणों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हालांकि, ग्रहण और उसके प्रभाव से जुड़ी ज्योतिषीय बातें धार्मिक एवं पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। इनके वैज्ञानिक प्रभावों को लेकर अलग दृष्टिकोण है।
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