Amarnath yatra 2025: अमरनाथ यात्रा में जल्दबाजी! तेजी से पिघल रहा शिवलिंग, श्रद्धालुयों में चिंता

Amarnath yatra 2025: जम्मू-कश्मीर में वार्षिक अमरनाथ यात्रा शुरू हो गई है, जिसमें अब तक एक लाख से अधिक तीर्थयात्री 3,880 मीटर की ऊंचाई पर…

Amarnath yatra 2025: जम्मू-कश्मीर में वार्षिक अमरनाथ यात्रा शुरू हो गई है, जिसमें अब तक एक लाख से अधिक तीर्थयात्री 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित अमरनाथ गुफा में दर्शन कर चुके हैं. इस यात्रा के लिए 3.5 लाख से अधिक लोगों ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराया है.(Amarnath yatra 2025 news in hindi)

अमरनाथ गुफा में स्थित बर्फ का शिवलिंग, जो प्राकृतिक रूप से बनता है, कश्मीर घाटी में भीषण गर्मी के कारण धीरे-धीरे पिघल रहा है, जिससे देखकर तीर्थयात्री और स्थानीय लोग हैरान हैं.

श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि अब वे यह अनुमान नहीं लगाते कि बर्फ का शिवलिंग कितने समय तक रहेगा. एक वरिष्ठ सदस्य ने कहा कि हर साल शिवलिंग तेजी से पिघलता है और पहले यह अगस्त तक रहता था, लेकिन अब मौसम अप्रत्याशित हो गया है. भारी बारिश और तापमान में अचानक वृद्धि के कारण भविष्यवाणी करना मुश्किल हो गया है. बोर्ड केवल सुविधाएं बढ़ा सकता है, लेकिन मौसम को नहीं बदल सकता.

नाराज होने लगे हैं भोलेनाथ…
पटना के रहने वाले एक पर्यटक ने बताया कि वो पिछले 15 साल से अमरनाथ यात्रा कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि मैं कैलाश मानसरोवर नहीं जा सकता, इसलिए अमरनाथ यात्रा की इच्छा मन में जागी. शुरुआती सालों में शासकीय व्यवस्था खानापूर्ति जैसी रहती थी. लेकिन बाबा का दरबार उस समय भी चकाचक रहता था.

12 से 15 फुट ऊंचा बाबा का बर्फ का विग्रह एक अलौकिक आकर्षण और आंतरिक भक्ति भाव पैदा करता था. रास्ते का कष्ट बाबा अपने उज्जवल स्वरूप में दर्शन देकर हर लेते थे. ‘नमः पार्वती पतये हर हर महादेव’ की गूंज अपने ईश्वर से क्षण भर के लिए ही सही एकात्म कर देती थी. आनंद की व्याख्या नहीं की जाती, आनंद अनुभव का विषय है.

अमरनाथ में बर्फ का शिवलिंग, जो आमतौर पर हिंदू महीने श्रावण (जुलाई-अगस्त) में बनना शुरू होता है, हाल के वर्षों में तेजी से पिघल रहा है. यह पिघलने की दर इस क्षेत्र के जलवायु संकट का एक संकेतक बन गया है. पिछले कुछ वर्षों में, शिवलिंग की अवधि में लगातार कमी आई है:

2018 में, यह 29 दिनों तक ही बना रहा और 27 जुलाई तक पिघल गया.

2019 में, यात्रा आतंकी धमकियों के कारण रद्द कर दी गई थी

2020 में, यह 38 दिनों तक रहा और 23 जुलाई तक 80% पिघल गया.

2021 में, महामारी के कारण यात्रा फिर से रद्द करनी पड़ी.

2022 में, यह केवल 28 दिनों तक चला और 18 जुलाई तक पिघल गया.

2023 में, यह 47 दिनों तक रहा और 17 अगस्त तक पिघल गया.

2024 में, यह केवल एक सप्ताह में, यानी 6 जुलाई तक, गायब हो गया.

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