रेवाड़ी, 15 जुलाई
मानसून और उमस भरी गर्मी के बीच जिले में मच्छर जनित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। जिले में हाल ही में डेंगू के तीन और मलेरिया के पांच मामले सामने आए हैं। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने इन बीमारियों की रोकथाम के लिए तत्काल कदम उठाए हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने डेंगू का लार्वा पाए जाने के बाद 376 लोगों को नोटिस जारी किए हैं। विभाग की टीमें जलभराव वाले सभी क्षेत्रों में सक्रिय रूप से जांच कर रही हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायतों तथा शहरी क्षेत्रों में नगर परिषदों को भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं। जिले में मच्छरों के प्रजनन स्थलों को नष्ट करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने 45 डोमेस्टिक ब्रीडिंग चेकर (DBC) नियुक्त किए हैं। ये सभी ब्रीडिंग चेकर जिले के प्रत्येक गांव, वार्ड और गली-मोहल्ले में जाकर घर-घर निरीक्षण करेंगे, मच्छरों के लार्वा की पहचान कर उन्हें नष्ट करेंगे तथा लोगों को डेंगू, मलेरिया और अन्य मच्छरजनित बीमारियों से बचाव के प्रति जागरूक भी करेंगे।
विभाग ने दवाओं के छिड़काव, फॉगिंग और अन्य आवश्यक उपायों के निर्देश दिए हैं। मच्छरों के प्रजनन स्थलों को नष्ट करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है ताकि बीमारियों के प्रसार को रोका जा सके। मलेरिया-डेंगू नोडल अधिकारी डॉ. जोगेंद्र सिंह ने बताया कि बारिश के मौसम में नमी और आर्द्रता मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल होती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने घरों के आसपास या किसी भी स्थान पर पानी जमा न होने दें। पुराने टायर, गमले, बाल्टी, कूलर या अन्य बर्तनों में पानी इकट्ठा न होने दें। उन्होंने आमजन से मच्छररोधी उपाय अपनाने, पूरे बाजू के कपड़े पहनने और रात के समय मच्छरदानी का उपयोग करने का आग्रह किया। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द या अन्य संदिग्ध लक्षण दिखाई दें तो बिना देरी किए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराएं।
स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं और आवश्यकता पड़ने पर फॉगिंग तथा लार्वीसाइडल छिड़काव अभियान को और तेज किया जाएगा। जिला प्रशासन का उद्देश्य मच्छर जनित बीमारियों के प्रसार को प्रभावी ढंग से रोकना है।
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