नवांशहर SCHOOL OF EMINENCE फीस विवाद, छात्रों-परिजनों ने प्रिंसिपल के पक्ष में उठाई आवाज,’बेहतर शिक्षा के लिए अतिरिक्त सहयोग भी मंजूर’

नवांशहर,19 जुलाई जिला शहीद भगत सिंह नगर (नवांशहर) स्थित स्कूल ऑफ एमिनेंस में अतिरिक्त फीस एवं विभिन्न फंड्स की वसूली का मामला अब नया मोड़…

नवांशहर
नवांशहर,19 जुलाई

जिला शहीद भगत सिंह नगर (नवांशहर) स्थित स्कूल ऑफ एमिनेंस में अतिरिक्त फीस एवं विभिन्न फंड्स की वसूली का मामला अब नया मोड़ ले चुका है। पहले जहां कुछ अभिभावकों द्वारा अतिरिक्त राशि वसूले जाने की शिकायत सरकार तक पहुंचाई गई, वहीं अब बड़ी संख्या में अभिभावक और छात्र स्कूल के प्रिंसिपल के समर्थन में खुलकर सामने आ गए हैं।

मिली जानकारी के अनुसार, एक छात्र और उसके परिजनों द्वारा अतिरिक्त फीस वसूले जाने की शिकायत स्थानीय विधायक के माध्यम से पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस तक पहुंचाई गई। शिक्षा मंत्री ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने का आश्वासन देते हुए कहा कि यदि जांच में अतिरिक्त राशि वसूले जाने की पुष्टि होती है तो संबंधित राशि अभिभावकों को वापस करवाई जाएगी।बताया जा रहा है कि इसके बाद स्कूल प्रशासन को सभी अतिरिक्त फंड वापस करने के निर्देश दिए गए।

इसी क्रम में स्कूल में पढ़ा रहे निजी शिक्षकों (प्राइवेट टीचर्स) सफाई सेवक की सेवाएं भी तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गईं। स्कूल के प्रिंसिपल की और से उसी फंड में से उनलोगों को मान भत्ता दिया जाता रहा है ।इस फैसले के बाद छात्रों और अभिभावकों में चिंता का माहौल बन गया। कई छात्रों ने भावुक होकर कहा कि जिन शिक्षकों ने उन्हें बेहतर शिक्षा और अनुशासन दिया, उनके अचानक हटने से उनकी पढ़ाई पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।

रविवार को अवकाश होने के बावजूद स्कूल के ऑडिटोरियम में बड़ी संख्या में छात्र और अभिभावक एकत्र हुए। बैठक में अधिकांश अभिभावकों ने स्कूल के प्रिंसिपल सरबजीत सिंह के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि उन्हें स्कूल द्वारा लिए गए फंड या अतिरिक्त शुल्क पर कोई आपत्ति नहीं है। उनका कहना था कि यदि बच्चों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुशासन और बेहतर भविष्य के लिए आवश्यकता पड़े तो वे अतिरिक्त सहयोग देने को भी तैयार हैं।

अभिभावकों ने कहा कि स्कूल ऑफ एमिनेंस में बच्चों को जिस स्तर की शिक्षा, मार्गदर्शन और अनुशासन मिल रहा है, वह कई निजी स्कूलों से भी बेहतर है। उन्होंने सरकार से मांग की कि किसी भी प्रशासनिक निर्णय से पहले छात्रों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए और पढ़ाई किसी भी स्थिति में प्रभावित नहीं होनी चाहिए।अब सभी की नजर शिक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट और आगामी फैसले पर टिकी हुई है। अभिभावकों का कहना है कि वे केवल इतना चाहते हैं कि बच्चों की शिक्षा निरंतर जारी रहे और उनका भविष्य किसी भी विवाद की भेंट न चढ़े।

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