भिवानी, 28 जुलाई
हरियाणा में बिजली कर्मचारियों ने सरकार की निजीकरण नीति के खिलाफ बड़ा आंदोलन छेड़ने का ऐलान किया है। संयुक्त एक्शन कमेटी के बैनर तले कर्मचारियों और अधिकारियों ने 11, 12 और 13 तारीख को प्रदेशव्यापी तीन दिवसीय हड़ताल की घोषणा की है। इससे पहले जिला मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन और उपायुक्तों को ज्ञापन सौंपे जाएंगे।
कर्मचारियों का कहना है कि यदि सरकार ने समय रहते बातचीत नहीं की तो बिजली व्यवस्था पर व्यापक असर पड़ सकता है।बिजली निगम की विभिन्न यूनियनों ने संयुक्त एक्शन कमेटी बनाकर सरकार की कथित निजीकरण नीति के खिलाफ संघर्ष तेज करने का फैसला लिया है। कर्मचारियों के अनुसार, पहले चरण में पूरे प्रदेश में सर्किल और जिला स्तर पर प्रदर्शन होंगे। इसके बाद डिवीजन और सब-डिवीजन स्तर पर विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे और अंत में 11, 12 और 13 तारीख को तीन दिन की प्रदेशव्यापी हड़ताल की जाएगी।
बिजली कर्मचारी नेताओं का आरोप है कि गुरुग्राम और नूंह में पैरेलल लाइसेंस, एग्री डिस्कॉम बनाने की योजना और स्मार्ट मीटर जैसी व्यवस्थाएं बिजली निगम के निजीकरण की दिशा में कदम हैं। उनका कहना है कि इससे कर्मचारियों के भविष्य, युवाओं के रोजगार और किसानों को मिलने वाली बिजली सब्सिडी पर असर पड़ सकता है। हालांकि, इन दावों पर सरकार का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
यूनियन नेताओं ने कहा कि उनका उद्देश्य हड़ताल करना नहीं, बल्कि सरकार का ध्यान अपनी मांगों की ओर आकर्षित करना है। उनका कहना है कि बिजली मंत्री और संबंधित अधिकारियों को कई बार ज्ञापन दिए जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। कर्मचारियों ने सरकार से बातचीत कर विवाद का समाधान निकालने की अपील की है।
संयुक्त एक्शन कमेटी का दावा है कि इस बार आंदोलन में कर्मचारियों के साथ इंजीनियर और अधिकारी भी शामिल होंगे, जिससे हड़ताल व्यापक हो सकती है। वहीं, यूनियन नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने समय रहते वार्ता नहीं की तो तीन दिवसीय हड़ताल के दौरान बिजली सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। अब सभी की नजर सरकार और कर्मचारियों के बीच संभावित बातचीत पर टिकी है।
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