Ludhiana Inspirational Story: लुधियाना के 25 वर्षीय शुभम सिंगला बने मिसाल, दिव्यांगता को मात देकर बने जज, राजस्थान ज्यूडिशियल सर्विस में 43वां रैंक हासिल

Ludhiana Inspirational Story To Be Judge: लुधियाना के रहने वाले 25 वर्षीय शुभम सिंगला ने अपनी कड़ी मेहनत और मजबूत इच्छाशक्ति के दम पर एक…

Ludhiana Inspirational Story: लुधियाना के 25 वर्षीय शुभम सिंगला बने मिसाल, दिव्यांगता को मात देकर बने जज, राजस्थान ज्यूडिशियल सर्विस में 43वां रैंक हासिल

Ludhiana Inspirational Story To Be Judge:

लुधियाना के रहने वाले 25 वर्षीय शुभम सिंगला ने अपनी कड़ी मेहनत और मजबूत इच्छाशक्ति के दम पर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. चलने-फिरने में असमर्थ होने के बावजूद शुभम ने राजस्थान ज्यूडिशियल सर्विस 2025 की परीक्षा में 43वां रैंक हासिल कर जज बनने का सपना पूरा किया है.

Ludhiana Inspirational Story: लुधियाना के 25 वर्षीय शुभम सिंगला बने मिसाल, दिव्यांगता को मात देकर बने जज, राजस्थान ज्यूडिशियल सर्विस में 43वां रैंक हासिल
Ludhiana Inspirational Story: शुभम सिंगला परिवार के साथ खुशी मनाते हुए

उनकी इस सफलता ने न (Ludhiana Inspirational Story) सिर्फ उनके माता-पिता बल्कि पूरे पंजाब का नाम रोशन किया है.

Ludhiana Inspirational Story, कमजोरी को नहीं आने दिया लक्ष्य के आड़े-

शुभम सिंगला की इस कामयाबी के बाद परिवार में खुशी का माहौल है. शुभम एक विशेष बीमारी से पीड़ित हैं. व्हीलचेयर के सहारे ही एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाते हैं. बावजूद इसके उन्होंने कभी अपनी कमजोरी को अपने लक्ष्य के आड़े नहीं आने दिया. शुभम ने यह मुकाम दूसरे प्रयास में हासिल किया. उनकी यह सफलता उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है, जो किसी न किसी चुनौती के कारण अपने सपनों को अधूरा छोड़ देते हैं.

क्रिकेट खेलने और संगीत का था शौक-

हमारी टीम से बातचीत के दौरान शुभम सिंगला ने बताया कि, उनका सपना शुरू से ही जज बनने का था. उन्हें क्रिकेट खेलने और संगीत का शौक था. बीमारी के कारण क्रिकेट खेलना संभव नहीं हो पाया. इसके बाद उन्होंने पूरी तरह अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित किया और संगीत के शौक को भी पीछे छोड़ दिया. उन्होंने कहा कि इस सफलता में उनके परिवार और दोस्तों का बहुत बड़ा योगदान है, जिन्होंने हर कदम पर उनका साथ दिया.

मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास मंत्र-

शुभम सिंगला का कहना है कि मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास के साथ किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है. उनकी कहानी आज के युवाओं के लिए एक मजबूत संदेश है कि हालात चाहे जैसे भी हों, सपनों को साकार किया जा सकता है.

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