Iran on the Strait of Hormuz:
अमेरिका और ईरान के बीच बेनतीजा रही बातचीत के बाद होर्मुज़ स्ट्रेट को लेकर पेच अभी भी फ़सा है. ईरान की संसद के उपाध्यक्ष हाजी बाबाई ने कहा है कि यह स्ट्रेट ईरान के लिए एक ‘अति संवेदनशील सीमा’ है. ‘इस्लामिक प्रोपेगेशन ऑर्गनाइज़ेशन’ से जुड़ी ‘मेहर न्यूज़ एजेंसी’ के मुताबिक़ बाबाई का कहना है कि होर्मुज़ स्ट्रेट पूरी तरह से ईरान के कब्ज़े में है और “इसका शुल्क रियाल में ही चुकाना होगा.” रियाल ईरान की मुद्रा है. अमेरिका अपनी तरफ से अलग दावे कर रहा है. ईरान की इस्लामाबाद शांति वार्ता पर भी प्रतिक्रिया आई है.
अमेरिकी पक्ष ईरान का भरोसा जीतने में पूरी तरह नाकाम
इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता की विफलता के बाद ईरान के शीर्ष वार्ताकार और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने इसके लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक के बाद एक कई पोस्ट करते हुए गालिबाफ ने कड़े तेवर दिखाए. उन्होंने कहा- ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने बातचीत के दौरान कई भविष्योन्मुखी और सकारात्मक पहल पेश की थीं, लेकिन अमेरिकी पक्ष ईरान का भरोसा जीतने में पूरी तरह नाकाम रहा. गालिबाफ ने कहा कि अब गेंद अमेरिका के पाले में है और उसे ही तय करना है कि वह ईरान का विश्वास हासिल करना चाहता है या नहीं.
अमेरिका के स्ट्रेट को खोलने के प्रयास
वंही दुसरी तरफ खबरें आ रही है कि अमेरिकी सेना ने इस अहम समुद्री रास्ते में बिछी संभावित बारूदी सुरंगों को हटा रही है. इसके लिए युद्धपोत, ड्रोन और हेलिकॉप्टर तैनात किए गए हैं. अमेरिकी केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) के तहत दो गाइडेड मिसाइल विध्वंसक युद्धपोत ऑपरेशन को अंजाम दे रहे हैं. अमेरिकी सेना के मुताबिक, यह अभियान खास तौर पर उन सुरंगों को हटाने के लिए है जिन्हें ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) से जोड़ा जा रहा है. ये सुरंगें बड़े जहाजों और तेल टैंकरों के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं.
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