India-Israel Relations: भारत और इज़राइल के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करने के लिए नई दिल्ली में महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक आयोजित की गई. इस बैठक में भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और इज़राइल के रक्षा मंत्रालय के महानिदेशक मेजर जनरल (रिटा.) आमिर बारम ने भाग लिया. दोनों पक्षों ने दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ मिलकर काम करने और रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का संकल्प लिया.
बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने रक्षा सहयोग को एक संस्थागत ढांचे में बदलने की जरूरत को समझा. आधिकारिक बयान के अनुसार, भारत और इस्राइल ने भविष्य में रक्षा क्षेत्र में तकनीकी, रणनीतिक और औद्योगिक साझेदारी को और मजबूती देने के इरादे से एक दीर्घकालिक ढांचा तैयार करने की दिशा में काम करने का फैसला किया है.
इज़राइल के रक्षा प्रमुख आमिर बारम ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की, जिसमें 26 लोगों की जान गई थी. उन्होंने भारत की आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में पूरा समर्थन देने की बात कही. इसके जवाब में भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने इज़राइल में हुए आतंकी हमले की निंदा की, जिसमें बड़ी संख्या में लोग मारे गए और बंधक बनाए गए थे.
आतंकवाद पर भारत की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति
रक्षा सचिव सिंह ने बैठक में भारत की ‘जीरो टॉलरेंस फॉर टेररिज्म’ नीति को दोहराया. उन्होंने कहा कि चाहे हमला भारत में हो या इस्राइल में, निर्दोष लोगों की हत्या किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उन्होंने सात अक्टूबर के हमले में बंधक बनाए गए सभी लोगों की तत्काल रिहाई की मांग की.
मेजर जनरल (रिटा.) आमिर बारम की यह यात्रा भारत-इस्राइल रक्षा संबंधों में एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है. इस मुलाकात ने दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और पुख्ता किया है. भारत और इस्राइल ने इस अवसर पर दोहराया कि वे न केवल सुरक्षा और तकनीकी क्षेत्र में बल्कि वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में भी एकजुट हैं.
सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी से भी की मुलाकात
इस्राइल के रक्षा मंत्रालय के महानिदेशक मेजर जनरल (रिजर्व) आमिर बाराम ने गुरुवार को भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी से मुलाकात की. दोनों अधिकारियों ने क्षेत्रीय भू-राजनीतिक परिस्थितियों और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देने के उपायों पर विस्तृत चर्चा की.
सेना की ओर से जारी बयान के अनुसार, यह मुलाकात नई दिल्ली में हुई जहां दोनों देशों के रक्षा संबंधों को और गहरा करने पर सहमति बनी. उन्होंने रक्षा सहयोग के नए आयामों की खोज की और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए साझा प्रतिबद्धता को दोहराया.
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