Meghalaya: मेघालय सरकार ने राज्य में एचआईवी/एड्स के बढ़ते मामलों को नियंत्रित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाने का फैसला किया है. अब शादी से पहले एचआईवी/एड्स परीक्षण अनिवार्य हो सकता है, जिसके लिए सरकार कानून लाने पर विचार कर रही है. स्वास्थ्य मंत्री अम्परीन लिंगदोह ने कहा कि अगर गोवा इस तरह का कानून ला सकता है, तो मेघालय भी अपने नागरिकों के हित में ऐसा कर सकता है.
मेघालय की स्वास्थ्य मंत्री ने यह बात उपमुख्यमंत्री प्रेस्टन टिनसांग की अध्यक्षता में पूर्व खासी हिल्स के आठ विधायकों के साथ बैठक के बाद कही. यह बैठक एचआइवी मामलों में तेजी से वृद्धि के मुद्दे पर बुलाई गई थी.
लिंगदोह का बयान
लिंगदोह ने कहा, “अगर गोवा में एचआईवी परीक्षण अनिवार्य हो सकता है, तो मेघालय में भी ऐसा कानून क्यों नहीं होना चाहिए? इससे व्यापक समुदाय को लाभ होगा और हम कड़े कदम उठाने के लिए तैयार हैं.
मेघालय में एचआईवी/एड्स की स्थिति
मेघालय देश में एचआईवी/एड्स प्रसार के मामले में छठे स्थान पर है, और पूर्वोत्तर क्षेत्र में इसकी स्थिति विशेष रूप से गंभीर है. पूर्वी खासी हिल्स जिले में एचआईवी/एड्स के मामले दोगुने हो गए हैं, जिसमें 3,432 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें से केवल 1,581 मरीजों को ही उपचार मिल रहा है.
सरकार के कदम
मेघालय सरकार एक व्यापक नीतिगत ढांचा तैयार करने की दिशा में काम कर रही है, जो रोकथाम, अनिवार्य परीक्षण और सभी मरीजों के लिए निरंतर उपचार सुनिश्चित करेगा. स्वास्थ्य विभाग इसकी प्राथमिक जिम्मेदारी लेगा, जबकि कानूनी विशेषज्ञ अनिवार्य परीक्षण कानून की व्यवहार्यता का अध्ययन करेंगे.
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