Mohali Greenfield Road Project Open:
पंजाब के ट्राइसिटी क्षेत्र में 31 किलोमीटर लंबा मोहाली–कुराली ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे (Greenfield Road Project) शुरु हो गया है. दो बार डेडलाइन मिस करने के बाद अब सोमवार से आम जनता के लिए खोल दी गई है. यह मोहाली के आईटी सिटी चौक को सीधे कुराली से जोड़ता है. जिससे न सिर्फ एयरपोर्ट रोड के यातायात भार में कमी आएगी बल्कि हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर जाने वाला मार्ग भी तेज और सुगम होगा.
31 किलोमीटर लंबी ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट-
मोहाली की बहुप्रतीक्षित ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट है. यह सड़क परियोजना महज 31 किलोमीटर लंबी है और पूरी तरह से ग्रीनफील्ड है. इस सड़क परियोजना को भारतमाला परियोजना के तहत विकसित किया गया है. सड़क शहीद भगत सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास मौजूद आईटी चौक (PR-7) को कुराली–चंडीगढ़ रोड से जोड़ती है. मोहाली के बाहरी इलाकों से गुजरने वाली इस सड़क का निर्माण महाराष्ट्र की एक कंपनी ने किया है, जिसे अक्टूबर 2022 में ठेका दिया गया था. यह परियोजना कई महीनों की देरी का बाद आखिरकार पूरी हुई है. अब आम जनता के लिए खोली गई है. इस सड़क के खुल जाने से एयरपोर्ट रोड और आसपास के इलाकों में लंबे समय से ट्रैफिक जाम से जूझ रहे लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है.
इसी साल सितंबर में पूरा हो जाना था (Greenfield Road Project) काम-
एयरपोर्ट रोड पर ट्रैफिक के बढ़ते दबाव को कम करने और दिल्ली से हिमाचल प्रदेश व जम्मू-कश्मीर की तरफ जाने वालों को वैकल्पिक मार्ग मुहैया कराने के लिए इस परियोजना की शुरुआत की गई थी. इस परियोजना का काम इसी साल जून और सितंबर में पूरा हो जाना था, लेकिन परियोजना समय पर पूरी नहीं हो पायी. इसके बाद 1 दिसंबर को सड़क को आम लोगों के लिए खोला जाना था. लेकिन टोल प्लाजा के पास एंट्री-एग्जिट रोड की मांग को लेकर यहां के जमीन मालिकों और किसान संगठनों ने भारी विरोध किया.
अनुमानित खर्च 1400 करोड़ रुपये-
NHAI के अनुसार, इस ग्रीनफील्ड सड़क मार्ग पर सिर्फ एक ही टोल प्लाजा है. हालांकि, फिलहाल वहां टोल वसूली शुरू नहीं होगी, क्योंकि अभी तक टोल दरें तय नहीं हो पायी हैं. यह परियोजना तब अस्तित्व में आई जब जुलाई 2019 में ज्यादा लागत के चलते 40 किलोमीटर लंबे खरड़–बनूर–टेपला रोड प्रोजेक्ट को रद्द कर दिया गया था. इस ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट का कुल अनुमानित खर्च 1400 करोड़ रुपये है, जिसमें से 700 करोड़ रुपये जमीन अधिग्रहण और 700 करोड़ रुपये निर्माण कार्य पर खर्च किए गए हैं.



