कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल बोले कोई भी राज्य CAA को लागू होने से नहीं रोक सकता !

ऑनलाइन डेस्क / लिविंग इंडिया न्यूज़: -कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने CAA को लेकर एक बयान दिया है जिसमें उन्होंने कहा कि,बयान में कपिल सिब्बल…

ऑनलाइन डेस्क / लिविंग इंडिया न्यूज़: -कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने CAA को लेकर एक बयान दिया है जिसमें उन्होंने कहा कि,बयान में कपिल सिब्बल ने कहा कि ऐसा कोई भी तरीका नहीं है, जिससे कोई भी राज्य नागरिकता संशोधन अधिनियम यानी CAA को लागू करने से इनकार कर सके जब CAA संसद द्वारा पहले से ही पारित कर दिया गया है। तो अब उसे रोकना और ऐसा करना असंवैधानिक होगा। अगर CAA पास हो जाता है तो कोई राज्य उसे नहीं रोक सकता है कि ‘मैं इसमें कुछ नहीं कर सकता यह संभव नहीं है और असंवैधानिक है। आप इसका विरोध कर सकते हैं, आप विधानसभा में एक प्रस्ताव लाकर पारित कर सकते हैं और केंद्र की मोदी सरकार से इसे वापस लेने की अपील कर सकते हैं। CAA संवैधानिक हैं उन्होंने कहा कि मैंने इसे लागू नहीं किया है, यह समस्याग्रस्त होने वाला है और अधिक मुश्किलें पैदा करेगा।

CAA पर बोले पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री खुर्शीद

तो वहीं कपिल सिब्बल के बयान पर उनके साथी और पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री खुर्शीद ने भी इस मुद्दे पर उनको अपना समर्थन दिया है खुर्शीद ने कहा कि हमें इस कानून का पालन करना होगा। इस दौरान खुर्शीद ने कहा कि, “अगर सुप्रीम कोर्ट इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करता है, तो यह क़ानून की किताब पर बना रहेगा। क़ानून की किताब पर कुछ है, तो आपको कानून का पालन करना होगा।

सलमान खुर्शीद ने दिया सुझाव

सलमान खुर्शीद ने सुझाव देते हुए कहा कि, हम सभी को CAA पर निर्णय लेने के लिए उच्चतम न्यायालय की प्रतीक्षा करनी चाहिए। ये  ऐसा मामला है जहां पर राज्य सरकार के पास केंद्र के साथ बहुत गंभीर मसला है हम सुप्रीम कोर्ट के दिए गए अंतिम फैसले का इंतजार करेंगे।

22 जनवरी को होगी CAA पर सुनवाई 

बतादे कि,सीएए की वैधता को चुनौती देने वाली शीर्ष अदालत में व्यक्तियों और राजनीतिक दलों द्वारा  60 याचिकाएं दायर की गई हैं। इनकी सुनवाई 22 जनवरी को होने की संभावना है।

केरल कर चुका है CAA के किलाफ प्रस्ताव पारित

बतादें कि इससे पहले केरल पहला राज्य बना जिसने राज्य में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा कानून को “संविधान में निहित समानता, स्वतंत्रता और धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों का उल्लंघन करने वाला” घोषित करने के बाद संशोधित अधिनियम को चुनौती दी।

केरल विधानसभा भी पहली बार कानून के खिलाफ प्रस्ताव पारित करने वाली थी, जो अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से गैर-मुस्लिम शरणार्थियों के लिए भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के लिए 31 दिसंबर, 2014 से पहले भारत में पहुंचती है।

 

 

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