Asha Bhosle Biography:
मशहूर भारतीय सिंगर आशा भोसले (Asha Bhosle) का 12 अप्रैल को निधन हो गया। 92 साल की उम्र में उन्होंने आखिरी सांस ली। उनका निधन मल्टीपल ऑर्गन फेलियर बताया जा रहा है। उनका जन्म 8 सितंबर 1933 को हुआ था। उन्होंने करीब 800 से अधिक फिल्मों के लिए 12,000 से अधिक गाने रिकॉर्ड किए।
बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्
उन्हें मिले सम्मानों में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में संगीत के इतिहास में सबसे अधिक गाने रिकॉर्ड करने वाली कलाकार के रूप में है। उन्हें साल 2008 में पद्म विभूषण और साल 2000 में दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया। इसके अलावा सर्वश्रेष्ठ महिला पार्श्व गायिका के तौर पर उन्हें 7 फिल्मफेयर पुरस्कार दिए जा चुके हैं। संगीत के अलावा आशा जी को कुकिंग से भी प्यार था। उन्होंने खुद कहा था कि ‘अगर वो गायिका न होतीं तो एक शैफ सेफ (chef) होतीं’। Asha नाम से एक अंतरराष्ट्रीय रेस्टोरेंट चेन की स्थापना की।
मंगेशकर परिवार में जन्मी
महाराष्ट्र में जन्म लेने वाली मंगेशकर परिवार में जन्मीं आशा लोकप्रिय गायिका लता मंगेशकर की छोटी बहन हैं। उन्होंने कम उम्र में ही फिल्मों के लिए गाना शुरू कर दिया था। उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर से शास्त्रीय संगीत की शिक्षा प्राप्त की थी। उन्होंने फिल्म चुनरिया (1948) से अपने करियर की शुरुआत की थी। वे हर तरह के गाने जैसे- गजल, पॉप आदि गाती थी, लेकिन उनकी खासियत सेंशुअल और वेस्टर्न स्टाइल के गानों में थी।
तरह के गाने (गजल, पॉप आदि) उनकी गायन क्षमता
यूं तो हर तरह के गाने (गजल, पॉप आदि) उनकी गायन क्षमता के दायरे में आते थे, लेकिन उनकी खासियत सेंशुअल और वेस्टर्न स्टाइल के गानों में थी। जीनत अमान से लेकर उर्मिला मातोंडकर तक, जिन भी अभिनेत्रियों के लिए उन्होंने गाया उन सभी को पर्दे पर पहले से कहीं अधिक आकर्षक बनाने की आशा में एक अनोखी प्रतिभा थी। शुरुआती सालों में उन्होंने ज्यादातर शमशाद बेगम, गीता दत्त या फिर लता के साथ डूएट गाने गाए।
साल 1957 से मिला मिला बड़ा ब्रेक
साल 1957 में उन्हें संगीतकार ओ.पी. नैयर के साथ फिल्मों ‘तुमसा नहीं देखा’ और ‘नया दौर’ (1957) में बड़ा ब्रेक मिला। 1958 में उनकी तीन फिल्में रिलीज हुईं ‘लाजवंती’ (1959), ‘हावड़ा ब्रिज’ (1958) और ‘चलती का नाम गाड़ी’ (1958), इन फिल्मों के हिट गानों ने आशा को सफलता की ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया। 1970 के दशक की शुरुआत तक नैयर की पसंदीदा गायिका रहीं। दोनों ने साथ मिलकर संगीत का जादू बिखेरा, खासकर फिल्मों ‘फिर वही दिल लाया हूं’ (1963), ‘मेरे सनम’ (1965), ‘हमसाया’ (1968) और ‘प्राण जाए पर वचन ना जाए’ (1974) में।
गानों की लंबी लिस्ट
‘दम मारो दम’,’पिया तू अब तो आजा’,’दिल चीज क्या है’,’ये मेरा दिल’ और ‘चुरा लिया है तुमने’ शामिल हैं। साल 1960 के दशक के अंत तक, वह अपनी बहन के बाद दूसरे स्थान पर सबसे पॉपुलर सिंगर्स में से एक थीं। दोनों ही बहनें 1990 के दशक तक प्लेबैक सिंगिंग की क्वीन कहलाईं।
16 साल की उम्र में शादी
उन्होंने 16 साल की उम्र में गणपतराव भोसले से शादी की हालांकि बाद में उनका तलाक हो गया। 1980 में संगीत निर्देशक आर.डी. बर्मन से शादी की और दोनों ने मिलकर जोरदार संगीत तैयार किया। हरे रामा हरे कृष्णा (1971), जवानी दीवानी (1972), प्रोसेशन ऑफ मेमोरीज (1973), और हम किसी से कम नहीं (1977) जैसी उनकी सबसे बड़ी हिट फिल्में थीं।
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