दिल्ली, 17 अगस्त
आज सावना का तीसरा सोमवार और नाग पंचमी का विशेष संयोग बना है। सावन सोमवार को भगवान शिव की पूजा के साथ नाग देवता की पूजा करना विशेष लाभकारी माना जाता है।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव के गले में नाग विराजमान हैं, इसलिए इस दिन शिव और नाग देवता की पूजा को विशेष फलदायी माना जाता है।
पंचांग के अनुसार, 17 अगस्त को ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:24 बजे से 5:08 बजे तक और अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:59 बजे से दोपहर 12:51 बजे तक रहेगा। भक्त इन शुभ समय में भगवान शिव की पूजा, जलाभिषेक और मंत्र जाप कर सकते हैं।
पूजा की विधि और जरूरी नियम
सावन सोमवार पर सुबह स्नान कर भगवान शिव का जलाभिषेक कर बेलपत्र, फूल और फल अर्पित किए जाते हैं। इसके साथ ही श्रद्धालु शिव मंत्र का जाप करें।नाग पंचमी पर नाग देवता की प्रतिमा या तस्वीर की पूजा करने की परंपरा है।कई स्थानों पर नाग देवता को दूध अर्पित करने की परंपरा है।इस दिन जरूरतमंदों को अन्न-वस्त्र और जरूरी सामान का दान करें।
उज्जैन में नागचंद्रेश्वर मंदिर में उमड़ी भीड़
सावन सोमवार औऱ नाग पंचमी को देखते हुए उज्जैन के नागचंद्रेश्वर मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ी हुई है।मंदिर के कपाट मध्यरात्रि 12 बजे ही खुल दिए गए।साल में केवल 24 घंटे दर्शन के लिए खुलने वाले इस मंदिर में देशभर से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
नाग पंचमी पर इन 12 नाग देवताओं का स्मरण
धार्मिक परंपरा में नाग पंचमी पर अनंत, वासुकी, शेष, पद्म, कंबल, कर्कोटक, अश्वतर, धृतराष्ट्र, शंखपाल, कालिया, तक्षक और पिंगल नागों के पूजन का उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि नाग देवता की पूजा परिवार की सुख-शांति और सुरक्षा की कामना के लिए की जाती



