कलायत 12 जुलाई
कलायत के गांव सजूमा में दूषित पेयजल की सप्लाई के कारण हेपेटाइटिस-ए और पीलिया ने महामारी का रूप धारण कर लिया है। जन स्वास्थ्य विभाग की घोर लापरवाही के चलते गांव की एक 11 वर्षीय मासूम बच्ची रितिका की मौत हो गई, जबकि उसका 6 वर्षीय छोटा भाई और गांव के दर्जनों अन्य बच्चे विभिन्न अस्पतालों में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। इस दर्दनाक हादसे के बाद जब स्वास्थ्य विभाग, जन स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक टीमें गांव पहुंचीं, तो ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा।
ग्रामीणों ने अधिकारियों को आड़े हाथों लेते हुए तीखी बहस की और आरोप लगाया कि बार-बार शिकायत के बावजूद दूषित पानी की सप्लाई बंद नहीं की गई, जिसका खामियाजा आज हर दूसरी-तीसरी गली में बीमार पड़े बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। इस जानलेवा संक्रमण ने गांव के कई गरीब परिवारों को आर्थिक और मानसिक रूप से तोड़कर रख दिया है। पीड़ित ग्रामीण महिला वर्षा ने बताया कि उनके दो बेटे उज्जवल व लक्ष्य और ननंद का लड़का ईशान इस बीमारी की चपेट में हैं, जिनका कर्ज उठाकर निजी अस्पताल में इलाज कराना पड़ रहा है।
इसी तरह बलदेवी और बबीता के घर में 7 वर्षीय परी और 11 वर्षीय आर्यन पिछले तीन दिनों से उल्टी-दस्त और पीलिया से तड़प रहे हैं। इस संकट के बीच सरकारी विभागों की आपसी खींचतान भी सामने आ गई है। स्वास्थ्य विभाग की अधिकारी ने माना कि पाइपलाइन में लीकेज के कारण दूषित पानी घरों में पहुंचा है और लिए गए 26 सैंपलों में से 19 बच्चे पॉजिटिव मिले हैं। इसके विपरीत, जन स्वास्थ्य विभाग के एसडीओ विनोद कुमार और एक्सईएन अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए दावा कर रहे हैं कि पानी स्वच्छ है और पीलिया फैलने के अन्य कारण हो सकते हैं।
अधिकारियों के इस संवेदनहीन रवैये से ग्रामीणों में भारी रोष है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कैथल के विधायक आदित्य सुरजेवाला ने सजूमा गांव का दौरा किया। उन्होंने मृतक बच्ची के परिजनों और अन्य पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर ढाढस बंधाया और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में जाकर मरीजों का हाल जाना। सरकार को आड़े हाथों लेते हुए सुरजेवाला ने कहा कि भाजपा सरकार धरातल पर लोगों को स्वच्छ पेयजल तक मुहैया कराने में पूरी तरह नाकाम रही है। उन्होंने हांसी के चानोत गांव का उदाहरण देते हुए कहा कि पूरे प्रदेश में पानी के लिए हाहाकार मचा है।
विधायक ने आश्वासन दिया कि वे सजूमा के इस गंभीर मुद्दे को विधानसभा में उठाएंगे और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करवाएंगे। फिलहाल, स्थिति को संभालने के लिए स्वास्थ्य विभाग की दो दर्जन से अधिक कर्मचारियों व आशा वर्कर्स की टीमें गांव में डेरा डाले हुए हैं और घर-घर जाकर दवाइयां व क्लोरीन की गोलियां वितरित कर रही हैं।
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