Samrala Fire:
समराला के गांव सेहजो माजरा में, आग लगने से गरीब मजदूरों की 30 से ज़्यादा झुग्गियां जलकर राख हो गईं। झुग्गियों में कई मजदूर अपने परिवारों के साथ रहते हैं। अचानक एक झुग्गी से आग की लपटें निकलने लगीं, जो देखते ही देखते बिना किसी को पता चले बाकी सभी झुग्गियों में फैल गईं। झुग्गियों में महिलाएं और बच्चे मौजूद थे, जबकि पुरुष काम के लिए खेतों में गए हुए थे। परिवारों ने सबसे पहले अपने बच्चों और जानवरों को बाहर सुरक्षित जगह पर पहुंचाया और गांव वालों के साथ मिलकर आग बुझाने की कोशिश की।
3 घंटे की मशक्कत के बाद आग पर पाया काबू पाया
DSP समराला प्रीतपाल सिंह और असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर सोहन सिंह भी मौके पर पहुंच गए और फायर ब्रिगेड की गाड़ियां बुलाई गईं। समराला से आई गाड़ियों ने करीब 3 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक 30 से ज़्यादा झुग्गियां जलकर राख हो चुकी थीं। इन झुग्गियों में गरीब मजदूरों का सारा घरेलू सामान—जिसमें अनाज, बर्तन, पंखे, स्कूल की किताबें, साइकिलें, कपड़े, ज़रूरी कागज़ात और साथ ही कई मजदूरों की अपनी मेहनत की कमाई से जमा की गई नकदी भी शामिल थी—सब कुछ जलकर राख हो गया। आज जब इन गरीब मजदूरों की हालत देखी गई, तो उनके पास न सिर पर छत थी, न खाने के लिए अनाज और न ही पहनने के लिए कपड़े। ये गरीब मजदूर आग में तबाह हुए अपने सामान में से कुछ चीज़ें बचाने की कोशिश कर रहे थे, ताकि वे अपने घरों को दोबारा बना सकें।
प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंचे
प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और आग से प्रभावित झुग्गियों में रहने वाले गरीब मजदूरों की एक सूची तैयार की। उच्च अधिकारियों को भेज सकें और कुछ मुआवज़े की मांग कर सकें। इस सूची के अनुसार, गणेश, ऋषिदेव, वासु, बिलास, पंकज, सीता देवी, कीर्तनंद, अवध चौधरी, शिवा, मुकेश, मानकी, सुनील, मीना, रूपेश, सुजू और तूफान के नाम शामिल हैं, जिनकी झुग्गियां जलकर राख हो गई हैं। पंचायत ने गरीबों के लिए मुआवज़े की मांग की
मौके पर पहुंचे गांव सेहजो माजरा के सरपंच जसवीर सिंह ने कहा कि ये गरीब मज़दूर माछीवाड़ा इलाके में किसानों के खेतों में काम करके अपने परिवारों का गुज़ारा करते हैं। उन्होंने कहा कि हालांकि वे दूसरे राज्यों के रहने वाले हैं, लेकिन वे कई सालों से यहां झुग्गियों में रह रहे हैं। उन्होंने बताया कि 2 साल पहले भी यहां झुग्गियों में आग लगने से काफी नुकसान हुआ था, लेकिन तब भी सरकार ने कोई मुआवज़ा नहीं दिया था। उन्होंने कहा कि आज आग लगने से इन गरीब मज़दूरों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है, इसलिए सरकार को उनकी मदद करनी चाहिए और तुरंत मुआवज़ा देना चाहिए।
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