सोनीपत में असम से खरीदकार लाए 15 साल की किशोरी, गड्ढे में दफनाया शव, महिला तस्कर गिरफ्तार, पति फरार

सोनीपत. 10 अगस्त सोनीपत में करीब ढाई साल पहले असम से 15 साल की किशोरी को खरीदकर लाया गया।मकसद था कि उसे आगे किसी अच्छे…

सोनीपत

सोनीपत. 10 अगस्त

सोनीपत में करीब ढाई साल पहले असम से 15 साल की किशोरी को खरीदकर लाया गया।मकसद था कि उसे आगे किसी अच्छे खरीदार को बेचकर मोटी रकम कमाई जाएगी। लेकिन खरीदार नहीं मिला तो किशोरी उसी घर में रह गई। समय बीतता गया और फिर एक दिन उसकी तबीयत बिगड़ी। इलाज के लिए रोहतक ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम में भी मौत की वजह बीमारी सामने आई।

इसके बाद कहानी का वह हिस्सा सामने आया, जिसने पूरे मामले को गंभीर बना दिया। आरोप है कि मौत के बाद उसके शव का अंतिम संस्कार करने के बजाय उसे गाड़ी में रखकर मलिकपुर लाया गया और यहां जोहड़ के पास गड्ढा खोदकर जमीन में दबा दिया गया।

कुछ दिन बाद कुत्तों ने गड्ढा खोदकर शव को बाहर निकाल दिया और ग्रामीणों की नजर पड़ी तो पूरा मामला खुल गया। अब पुलिस ने इस मामले में जयंती को गिरफ्तार किया है, जबकि उसका पति ओम प्रकाश फरार है। पुलिस के मुताबिक, ओम प्रकाश पर पहले भी मानव तस्करी का मामला दर्ज है।

18 जुलाई को जोहड़ के गड्ढे से मिला था शव

मलिकपुर गांव में 18 जुलाई को जोहड़ के पास गड्ढे में किशोरी का शव मिलने से सनसनी फैल गई थी। शुरुआत में पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यही था कि आखिर किशोरी कौन है और उसका शव यहां किसने दबाया। ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को बाहर निकलवाकर जांच शुरू की गई।

जांच आगे बढ़ी तो किशोरी की पहचान और उसकी मौत से जुड़े घटनाक्रम की परतें खुलती चली गईं।

असम से सोनीपत तक पहुंची किशोरी की कहानी

पुलिस पूछताछ में गिरफ्तार जयंती ने कथित तौर पर बताया कि किशोरी को करीब ढाई साल पहले असम से खरीदकर लाया गया था। जयंती और उसका पति ओम प्रकाश उसे इसलिए लेकर आए थे कि आगे किसी व्यक्ति को अच्छे दाम में बेच सकें।यानी किशोरी उनके पास रहने के लिए नहीं, बल्कि कथित तौर पर बेचने के लिए लाई गई थी।पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि असम में किशोरी को किससे खरीदा गया, कितने रुपये में सौदा हुआ और उसे सोनीपत तक कौन लेकर आया।

खरीदार नहीं मिला तो घर में ही रहने लगी

जयंती के पुलिस को दिए बयान के अनुसार, काफी समय तक दोनों को ऐसा खरीदार नहीं मिला जो किशोरी को अच्छे दाम में खरीद सके। किशोरी की उम्र भी कम थी। ऐसे में उसे बेचने का सौदा नहीं हो पाया और वह पति-पत्नी के साथ उनके घर पर ही रहने लगी।करीब ढाई साल तक यह सिलसिला चलता रहा। लेकिन किशोरी की मौत के बाद जो कुछ हुआ, उसने पूरे मामले को फिर से पुलिस की जांच के केंद्र में ला दिया।

टाइफाइड हुआ, रोहतक में कराया इलाज

पुलिस के मुताबिक, मौत से पहले किशोरी बीमार हुई थी। उसे टाइफाइड हुआ था। हालत बिगड़ने पर उसे इमरजेंसी में भर्ती कराया गया और रोहतक में उसका इलाज चला।इलाज के दौरान ही उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण बीमारी होना पहले ही स्पष्ट हो चुका है। इसलिए पुलिस की मौजूदा जांच का मुख्य सवाल यह नहीं है कि किशोरी की मौत कैसे हुई, बल्कि यह है कि मौत के बाद उसके शव को छिपाने की जरूरत क्यों पड़ी और उसे किसने जोहड़ में दबाया।

अंतिम संस्कार के लिए यमुना ले जाना चाहते थे

पुलिस के अनुसार, किशोरी की मौत के बाद जयंती और ओम प्रकाश उसके शव का अंतिम संस्कार यमुना नदी के किनारे करना चाहते थे। इसी सिलसिले में वे शव को गाड़ी में रखकर मलिकपुर पहुंचे।मलिकपुर में उनकी एक रिश्तेदार रहती है। दोनों उसके घर पहुंचे और किशोरी के बीमार होने की बात बताई। उस समय शव गाड़ी में ही रखा हुआ था।

बहन के घर के सामने ही खोद दिया गड्ढा

आरोप है कि यमुना ले जाने के बजाय दोनों ने मलिकपुर में बहन के घर के सामने बने जोहड़ के पास गड्ढा खोदा और किशोरी के शव को उसमें दबा दिया।यह कदम ही पूरे मामले की सबसे अहम कड़ी बन गया। क्योंकि शव को खुले तौर पर अंतिम संस्कार करने के बजाय जमीन में दबाने से ग्रामीणों को शक हुआ और पुलिस तक सूचना पहुंची।

कुत्तों ने खोदा गड्ढा, बाहर आया शव

शव को जमीन में दबाने के बाद कुछ समय तक किसी को इसकी जानकारी नहीं हुई। लेकिन बाद में कुत्तों ने गड्ढा खोद दिया और शव को नोचने लगे।गांव के एक व्यक्ति की नजर जब इस पर पड़ी तो उसने मामले की जानकारी सरपंच को दी। सरपंच ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू की।यहीं से उस 15 साल की किशोरी की पूरी कहानी सामने आने लगी, जो करीब ढाई साल पहले असम से सोनीपत लाई गई थी।

पति पर पहले से मानव तस्करी का केस

इस मामले में पुलिस की जांच इसलिए भी गंभीर हो गई है क्योंकि आरोपी ओम प्रकाश के खिलाफ पहले से खरखौदा थाना में मानव तस्करी से संबंधित मामला दर्ज बताया जा रहा है।अब पुलिस इस पुराने मामले और वर्तमान मामले के बीच किसी कड़ी की भी जांच कर रही है। साथ ही यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि किशोरी को असम से खरीदकर लाने और आगे बेचने की कथित योजना में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था या नहीं।

जयंती गिरफ्तार, ओम प्रकाश फरार

मुरथल थाना प्रभारी राजीव कुमार ने बताया कि किशोरी का शव जोहड़ में दबाने के मामले में जयंती को गिरफ्तार किया गया है। उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।वहीं उसका पति ओम प्रकाश अभी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की अलग-अलग टीमें लगाई गई हैं।

असम से सोनीपत तक तलाशे जाएंगे तार

पुलिस की जांच अब सिर्फ मलिकपुर के जोहड़ तक सीमित नहीं है। जांच का एक अहम हिस्सा यह भी है कि किशोरी असम से सोनीपत तक कैसे पहुंची। उसे कथित तौर पर किससे खरीदा गया, इस सौदे में कौन-कौन लोग शामिल थे और उसे आगे बेचने के लिए किन लोगों से संपर्क किया गया था।इसके अलावा पुलिस किशोरी के परिवार और उसके असम स्थित मूल स्थान के बारे में भी जानकारी जुटा रही है, ताकि पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ा जा सके।

मौत बीमारी से हुई, लेकिन शव छिपाने का राज बना सवाल

इस मामले में एक बात पोस्टमार्टम से साफ हो चुकी है कि किशोरी की मौत बीमारी के कारण हुई थी। लेकिन मौत के बाद शव को अंतिम संस्कार के बजाय जोहड़ में गड्ढा खोदकर दबाने की वजह अब पुलिस जांच का अहम हिस्सा है।किशोरी को कथित तौर पर खरीदकर लाने से लेकर उसे बेचने के लिए खरीदार तलाशने और मौत के बाद शव को छिपाने तक की पूरी कहानी में कौन-कौन लोग शामिल थे, इसका खुलासा आरोपी ओम प्रकाश की गिरफ्तारी और आगे की पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगा।

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