संगरूर: नौकरी की तलाश में गए 39 भारतीय इराक के मोसुल शहर में आईएसआईएस के चंगूल में फंस गए जिन में कई पंजाब के थे । उन्ही में से एक हैं पंजाब के जिला संगरूर के धूरी से पितरपाल सिंह, जो 2011 में घर की हालत ठीक न होने के चलते रोटी कमाने इराक गया था लेकिन 2014 जून में उसने फ़ोन कर अपने अगवा होने की बात कही थी, तभी से परिवार बेचैन है । लेकिन हाल ही में मोसुल पर इराक सेना के कब्जे ने परिवार की उम्मीद को फिर से जगा दिया है और उन्हें फिर से अपनों की घर वापसी की उम्मीद जगी है।
हाथ में पति की फोटो मांग में सिंदूर, चेहरे पर उदासी, ये है संगरूर से 6 साल पहले नौकरी के लिए इराक गए पिरतपाल सिंह की पत्नी। जो उम्मीद लगाए हुए है की उसका पति जल्द घर लौटेगा पिरतपाल 2011 में नौकरी की तलाश में इराक गया था बेटी तब महज 6 साल की थी 2014 को पत्नी को पिरतपाल ने फ़ोन कर अपने अगवा होने की वात कही थी। जिसके बाद ये उदास है, बेटी चुप पापा का इंतजार कर रही है फ़ोन पर पिरतपाल ने कहा था कि उन्हें आतंकियों ने अगवा कर लिया है अब दोबारा बात होनी मुश्किल है, मैने चोरी से आप को फ़ोन किया है। उस दिन के बाद दोबारा पिरतपाल से कभी बात नहीं हुई।
बेटी ने कहा मुझे पापा की बहुत याद आ रही है मैं विदेश मंत्री से विनती करती हूं की जल्द से जल्द मेरे पापा को घर ला दो क्योंकि अब तो इराक सरकार का मोसुल शहर पर कब्जा हो गया है जहां पर मेरे पापा को अगवा किया गया था हमें उम्मीद है की अब पापा घर लौटेंगे
पिरतपाल के रिश्तेदार ने कहा पिरतपाल घर की हालत ठीक ना होने के चलते रोटी के चक्कर में इराक़ गया था लेकिन उसे दूसरे भारतियों के साथ अगवा कर लिया गया था हम कई बार विदेश मंत्री से मिले पंजाब सरकार से मिले लेकिन कोई हल नहीं हुआ विदेश मंत्री कहती थी कि अगवा किए गए सभी भारतीय जिन्दा हैं जल्द ही उन्हें भारत ला दिया जाएगा हमें खवरों से पता चला है की मोसुल पर इराक की सेना का कब्ज़ा हो गया है अब सरकार को चाहिए की इराक सरकार से बातचीत कर पता लगाया जाए कि सभी भारतीय जो अगवा किए गए थे कहां हैं ?




