दिल्ली, 25 जुलाई
नीट-यूजी पेपर लीक विवाद के कारण आज पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने आज इस्तीफा दे दिया।हैरानी की बात यह है कि 1997 में उडीसा में पेपर लीक के खिलाफ ABVP के छात्र नेता के रुप में प्रधान ने उस समय में छात्र आंदोलन का नेतृत्व किया था। आज लगभग 29 साल बाद उसी मुद्दे पर धर्मेन्द्र प्रधान को अपना इस्तीफा देना पड़ा।
धर्मेंद्र प्रधान का जन्म 26 जून 1969 को ओडिशा के तालचेर में हुआ। उन्होंने उत्कल विश्वविद्यालय से मानव विज्ञान में MA किया और छात्र जीवन में ABVP से जुड़कर राजनीति जीवन की शुरुआत की। 1997 में ओडिशा में 12वीं के प्रश्नपत्र लीक के विरोध में उन्होंने बड़े छात्र आंदोलन का नेतृत्व किया था, जिसमें पुलिस लाठीचार्ज में वे घायल भी हुए थे।
इसके बाद उन्होंने भाजपा युवा मोर्चा और भाजपा संगठन में कई अहम जिम्मेदारियां भी निभाईं। 2000 में पहली बार वें विधायक बने, 2004 में सांसद चुने गए और 2012 में राज्यसभा पहुंचे। मोदी सरकार में 2014 से पेट्रोलियम मंत्री रहे, जहां प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना समेत कई महत्वपूर्ण योजनाओं को आगे बढ़ाया। 7 जुलाई 2021 को उन्हें शिक्षा मंत्री बनाया गया।
शिक्षा मंत्री के रूप में उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के क्रियान्वयन, डिजिटल शिक्षा और कौशल विकास पर जोर दिया। हालांकि उनके कार्यकाल में नीट-UG पेपर लीक, UGC-NET परीक्षा रद्द होने और NTA की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे।
नीट पेपर लीक के बाद छात्रों द्वारा लगातार जारी विरोध-के चलते आज 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया।
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