आज सावन महीने का पहला सोमवार पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। भगवान शिव को समर्पित आज का दिन शिव मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी लाइनें लगी हुई है। मान्यता है कि सावन के सोमवार के दिन भगवान शिव की पूजा, जलाभिषेक और व्रत करने से सुख-समृद्धि और सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन का महीना भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना माना जाता है। इस दौरान आने वाले प्रत्येक सोमवार का विशेष महत्व होता है। श्रद्धालु शिवलिंग पर जल, गंगाजल, पंचामृत, बेलपत्र, भांग, धतूरा, शमी के पत्ते, चंदन, अक्षत और मौसमी फल अर्पित कर ‘ॐ नमः शिवाय‘ मंत्र का जाप करते हैं। पूजा के अंत में घी का दीपक जलाकर भगवान शिव की आरती की जाती है।
पूजा के दौरान श्रद्धालुओं को कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। शिवलिंग पर हल्दी, कुमकुम, तुलसी के पत्ते और केतकी का फूल अर्पित नहीं किया जाता। वहीं, बेलपत्र हमेशा साबुत और साफ होना चाहिए। व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को सात्विक भोजन करना, क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूर रहना तथा दान-पुण्य करना शुभ माना जाता है।
सावन सोमवार की पूजा में सबसे पहले शिवलिंग को शुद्ध जल और गंगाजल से स्नान कराया जाता है। इसके बाद पंचामृत से अभिषेक कर कम से कम 108 बार ‘ॐ नमः शिवाय‘ मंत्र का जाप किया जाता है। फिर दोबारा जल से स्नान कराकर बेलपत्र, भांग, धतूरा, शमी के पत्ते, फल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित की जाती है। साथ ही माता पार्वती को सुहाग सामग्री और भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित कर पूरे शिव परिवार की पूजा की जाती है।
सावन के पहले सोमवार पर देश के प्रमुख शिव मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में तड़के करीब 2:30 बजे भस्म आरती के साथ भगवान महाकाल का पंचामृत अभिषेक किया गया और उन्हें भांग तथा सूखे मेवों से विशेष श्रृंगार किया गया। वहीं, झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम में भी जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।
धार्मिक मान्यता है कि सावन सोमवार का व्रत और भगवान शिव की सच्ची श्रद्धा से की गई आराधना भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती है। इस वर्ष सावन महीने में कुल चार सोमवार व्रत पड़ रहे हैं, जिनका विशेष धार्मिक महत्व माना गया है



