दिल्ली, 23 सितंबर
कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली जरूरी दवाओं की कीमतों में भारी अंतर पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने एक ऐसी दवा का उदाहरण दिया, जिसका अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) 27,000 रुपये छपा था, जबकि वही दवा रिटेलर को महज 2,700 रुपये में उपलब्ध कराई जा रही थी।
कोर्ट ने इसे मरीजों के साथ दिनदहाड़े डकैती करार दिया।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि मरीजों से इस तरह अधिक कीमत वसूलना बेहद गंभीर मामला है। कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि जिन अधिकारियों को ऐसी अनियमितताओं पर कार्रवाई करनी चाहिए, वे इस मामले में चुप क्यों है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘यह बिल्कुल चौंकाने वाली बात है कि जरूरी कैंसर की दवा का MRP 27,000 रुपये है, जबकि रिटेलर को यह 2,700 रुपये में दी जा रही है। रिटेलर को दी जाने वाली कीमत से MRP 10 गुना है।’ कोर्ट ने कहा कि अगर यह जबरन वसूली नहीं है तो और क्या है?अब देखना होगा आगे क्या फैंसला आता है।
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