ऑनलाइन डेस्क/लिविंग इंडिया: बराड़ा- अंबाला छावनी से करीब 25 किलोमीटर दूर बराड़ा कस्बे में दशहरे के मौके पर रावण का 40 क्विंटल भारी और 210 फुट ऊंचा पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाने वाला पुतला जलाया जाएगा i यह पुतला बराड़ा राम लीला क्लब द्वारा जलाया जायेगा i बराड़ा राम लीला क्लब ने वर्ष 1987 से पुतला दहन करना शुरू किया था i पहले साल क्लब ने 20 फुट ऊंचा पुतला दहन किया था और तब से वह हर वर्ष इसकी ऊंचाई बढा रहा है i
अंबाला के पास जलेगा 210 फुट ऊंचा पर्यावरण अनुकूल ‘रावण’
210 फुट ऊंचा है पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाने वाला पुतला
बराड़ा कस्बे में होगा 40 क्विंटल बजन वाले रावण के पुतले का दहन
श्री चमकौर साहिब
अनेकता में एकता की प्रमाणिकता आज भी चमकौर साहिब में दिखती है। जहाँ गुरुद्वारा श्री स चमकौर साहिब में रावण की पूजा की जाती है। और यह गुरुद्वारा पंजाब का पहला ऐसा गुरुद्वारा है जहाँ विद्वान रावण को पूजा जाता है।
गुरुद्वारा श्री चमकौर साहिब में होती है रावण की पूजा
पहला गुरुद्वारा है जहां की जाती है रावण की पूजा
देश -विदेश से आते है श्रद्धालु
कानपुर
आज दशहरा है और जग जाहिर है कि आज रावण का दहन किया जाता है, लेकिन देश में कुछ जगह ऐसी भी हैं जहां रावण की पूजा की जाती है i ऐसा ही एक मंदिर है कानपुर में जो साल में एक बार केवल दशहरे के दिन ही खुलता है i इस दिन मंदिर में रावण की पूजा होती है i जी हां कानपुर के दशानन मंदिर में आज सुबह से लोगों का तांता लगा हुआ है ये लोग रावण की पूजा करने के लिए आएं हैं i ऐसा माना जाता है कि दशहरे के दिन इस मंदिर में पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं i
केवल दशहरा के दिन खुलता है दशानन मंदिर
कई स्थानों पर की जाती है रावण की पूजा
विजयादशमी यानी दशहरा के दिन वैसे तो पूरे देश में रावण का दहन किया जाता है लेकिन भारत देश के कुछ ऐसे हिस्से भी हैं जहां पर रावण का दहन नहीं बल्कि उनकी पूजा की जाती है। ऐसा होने के पीछे कई मान्यताएं और कई तथ्य प्रचलित हैं i आइए आपको बताते है i देश के किन शहरों और गांवों में रावण की पूजा की जाती है।
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