Punjab :
पंजाब रोडवेज पनबस/पीआरटीसी कांट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन ने सरकार पर मांगों की अनदेखी के आरोप लगाते हुए आंदोलन करने की चेतावनी दी है। उन्होंने बताया कि 28 जनवरी की बैठक में उनकी मांगों का समाधान नहीं हुआ, तो चक्का जाम, पक्के धरने और मुख्यमंत्री के आवास पर प्रदर्शन किया जाएगा। शनिवार को लुधियाना के इसरू भवन में हुई राज्य स्तरीय बैठक हुई।
निजी कंपनियों को पहुंचा रहे फायदा
यूनियन ने आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान दर्ज मामलों में कई पदाधिकारी जेल में हैं। नेताओं का कहना है कि लोकतांत्रिक देश में आवाज उठाना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। यूनियन ने कहा कि सरकार बार-बार किलोमीटर स्कीम के टेंडर निकालकर निजी कंपनियों को फायदा पहुंचा रही है, जबकि यूनियन ने इसके घाटे के पुख्ता प्रमाण पहले ही दिए थे। पनबस और पीआरटीसी को मुफ्त यात्रा योजना के तहत लगभग 1200 करोड़ रुपये मिलने हैं, लेकिन भुगतान न होने से विभाग कर्मचारियों को वेतन देने में असमर्थ है।
ठेका प्रथा से कर्मचारियों का शोषण
यूनियन पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि ठेका प्रथा से कर्मचारियों का शोषण हो रहा है। निजीकरण से बेरोजगारी बढ़ेगी और निजी ऑपरेटर मनमाने किराए वसूलेंगे, जिससे आम जनता पर बोझ बढ़ेगा। राज्य महासचिव शमशेर सिंह ढिल्लो ने बताया कि 26 जनवरी को सभी डिपुओं में गेट रैलियां आयोजित की जाएंगी। इसके बाद 9 फरवरी को गेट रैलियां, 11 फरवरी को डिपुओं में बसें बंद, और 12 फरवरी को मुख्यमंत्री पंजाब के आवास पर धरना दिया जाएगा। यूनियन ने कहा कि आंदोलन के लिए पूरी जिम्मेदारी सरकार और प्रबंधन पर होगी।



