हरियाणा की जेलों में होगी ‘जीरो बजट खेती’, कैदियों को मिलेगा प्रशिक्षण

ऑनलाइन डेस्क/लिविंग इंडिया न्यूज: हरियाणा प्रदेश की सभी जेलों में अब जीरो बजट प्राकृतिक खेती की जाएगी। बता दें, इस अभियान की शुरुआत रोहतक जिला कारागार…

ऑनलाइन डेस्क/लिविंग इंडिया न्यूज: हरियाणा प्रदेश की सभी जेलों में अब जीरो बजट प्राकृतिक खेती की जाएगी। बता दें, इस अभियान की शुरुआत रोहतक जिला कारागार से गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत तथा हरियाणा के बिजली एवं जेल मंत्री चौधरी रणजीत सिंह ने की। बाद में सर्किट हाउस में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आचार्य देवव्रत ने बताया कि रोहतक जेल में बंदियों को जीरो बजट प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दिया गया। बंदियों ने बड़ी ध्यान से इस प्रशिक्षण में रुचि ली और उन्हें उम्मीद है कि जब से लोग अपने घरों को लौट आएंगे तो अपने गांव में घरों में जीरो बजट खेती को अपनाकर आय बढ़ाने का काम करेंगे।

इस दिशा में पद्मश्री सुभाष पालेकर द्वारा सराहनीय कार्य किया गया है। जीवन भर शोध करने के बाद उन्होंने जहरमुक्त खेती का अत्यन्त प्रभावी मॉडल प्रस्तुत किया है जिसका नाम है –‘जीरो बजट प्राकृतिक कृषि’। यह देशी गाय पर आधारित खेती की ऐसी पद्धति है, जिसमें एक देशी गाय से 30 एकड़ की खेती की जा सकती है। इसी पद्धति से पिछले 10 वर्षों से गुरुकुल कुरुक्षेत्र में करीब 200 एकड़ भूमि पर धान, गेहू्ँ, गन्ना, चना सहित आलू, गोभी, टमाटर, बैंगन, गाजर आदि सब्जियों की न केवल जहरमुक्त खेती दी जा रही है बल्कि उत्पादन भी रासायनिक और जैविक खेती करने वाले किसानों से अधिक ले रहे हैं।

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आचार्य देवव्रत ने बताया कि जीरो बजट प्राकृतिक कृषि, जैविक कृषि से बिल्कुल अलग है। जैविक कृषि का आधार गोबर व केंचुए की खाद है। फसलों में पौषक तत्त्वों की जरूरत को पूरा करने के लिए बहुत अधिक गोबर या केंचुए की खाद की जरूरत पड़ती है जो किसी भी किसान के लिए संभव नहीं है। जैविक कृषि में धान, गेहूँ, व मक्का जैसी फसलों की पौषक तत्त्वों की पूर्ति के लिए एक एकड़ की खेती में 20-25 पशुओं की आवश्यकता है । जबकि जीरो बजट प्राकृतिक कृषि में एक देशी गाय से 30 एकड़ की खेती संभव है। इसके अतिरिक्त केंचुए की खाद तैयार करने के लिए केंचुए की जो प्रजाति  प्रयोग की जाती है वह मिट्टी नहीं खाती और न ही भूमि में सुराख करके उसे प्राकृतिक रूप से उपजाऊ बनाती है बल्कि यह तो केवल गोबर और काष्ठ पदार्थ का ही भोजन के रूप में प्रयोग करती है।

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