ऑनलाइन डेस्क/लिविंग ईडिया न्यूज: सामूहिक बलात्कार पीड़िता निर्भया की मां आशा देवी ने बीजेपी और AAP पार्टी पर राजनीति करने का आरोप लगाया इस दौरान उन्होंने कहा कि, 2012 के सामूहिक बलात्कार मामले के दोषियों की फांसी, को जानबूझकर स्थगित किया जा रहा है। ये फांसी 22 जनवरी को होने वाली थी। और उसी दिन होनी चाहिए।
7 साल हो गए न्याय नहीं मिला
7 साल हो गए हैं और हमें न्याय नहीं मिला है। सरकार हमारा दर्द नहीं देख सकती हैं। दोनों पार्टियां लड़की की मौत पर राजनीति कर रही हैं। मुझे लगता है कि फांसी जानबूझकर स्थगित कर दी गई है। आशा देवी ने कहा कि भाजपा और आप पार्टी के बीच बातों का युद्ध चल रहा है। अब तक, मैंने कभी राजनीति के बारे में बात नहीं की, लेकिन अब मैं कहना चाहता हूं कि जिन लोगों ने 2012 में सड़कों पर विरोध प्रदर्शन किया था, आज वही लोग केवल राजनीतिक लाभ के लिए मेरी बेटी की मौत के साथ खेल रहे हैं।
AAP ने बोला BJP पर हमला
इससे पहले बीजेपी ने आरोप लगाया कि निर्भया के दोषियों को फांसी देने में देरी के लिए AAP पार्टी की सरकार जिम्मेदार है। जिसके बाद में, दिल्ली के उपमुख्यमंत्री और AAP पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने बीजेपी पर निशाना साधा और कहा कि हमें दो दिन के लिए दिल्ली पुलिस और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी दे देजिए और हम निर्भया के दोषियों को फांसी देंगे। वहीं उपमुख्यमंत्री और AAP पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया के बयान के बाद निर्भया की मां आशा ने कहा कि अच्छा होगा यदि सिसोदिया ने कहा है कि आप मुझे दिल्ली पुलिस दे दो, मैं लड़कियों की सुरक्षा करूंगा। इस, दौरान निर्भया की ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से यह सुनिश्चित करने का भी आग्रह किया कि दोषियों की फांसी 22 जनवरी को हो।
दोषियों को फांसी 22 जनवरी को नहीं होगी ?
इस बीच तिहाड़ जेल अधिकारियों के लिए स्थायी वकील एडवोकेट राहुल मेहरा ने कहा है कि 2012 के सामूहिक बलात्कार मामले में दोषियों को फांसी की सजा 22 जनवरी को नहीं होगी।उन्होंने कहा, कि दया याचिका खारिज होने के 14 दिन बाद ही यह फैसला हो सकता है क्योंकि हम नियम से बंधे हुए हैं जो कहता है कि दया याचिका खारिज होने के बाद दोषियों को 14 दिन का नोटिस दिया जाना चाहिए।इससे पहले, 2012 में एक अर्धसैनिक छात्र के साथ सामूहिक बलात्कार और हत्या के चार दोषियों में से एक मुकेश सिंह ने दिल्ली उच्च न्यायालय को सूचित किया था कि उनकी दया याचिका दिल्ली के उपराज्यपाल और भारत के राष्ट्रपति के समक्ष लंबित है और उन्हें उसकी दया याचिका की अस्वीकृति और निष्पादन की निर्धारित तिथि के बीच न्यूनतम 14 दिन का नोटिस दिया जाए।
दो दोषियों की याचिका खारिज
दिल्ली उच्च न्यायालय ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को अलग रखने से इनकार कर दिया, जिसमें डेथ वारंट जारी किया गया था। अदालत ने दोषी के वकील को ट्रायल कोर्ट से संपर्क करने और लंबित दया याचिका के बारे में अवगत कराने के लिए कहा था।सुप्रीम कोर्ट ने मामले में मुकेश सिंह सहित दो मौत की दोषियों की उपचारात्मक याचिकाओं को पहले ही खारिज कर दिया था।विनय शर्मा और मुकेश सिंह ने 22 जनवरी को फांसी की सजा के लिए दिल्ली की एक अदालत द्वारा उनके नाम पर डेथ वारंट जारी किए जाने के बाद शीर्ष अदालत में क्यूरेटिव याचिकाएं दायर की थी
#WATCH Asha Devi, mother of 2012 Delhi gang-rape victim: Till now, I never talked about politics, but now I want to say that those people who held protests on streets in 2012, today the same people are only playing with my daughter's death for political gains. pic.twitter.com/FvaC89TwKI
— ANI (@ANI) January 17, 2020
सुबह 7 बजे होगी फांसी
पवन और अक्षय नाम के दो अन्य दोषियों को भी उसी दिन सुबह 7 बजे दिल्ली की तिहाड़ जेल परिसर में मार दिया जाएगा। इस बीच, गृह मंत्रालय ने 2012 के दिल्ली सामूहिक बलात्कार मामले के दोषी मुकेश सिंह की दया याचिका गुरुवार रात राष्ट्रपति भवन भेज दी।




