Miri-Piri Day celebrated with great religious fervor

आज मीरी-पीरी दिवस है, सिख भाईचारा इस दिवस को आज धूम धाम से मना रहा है। श्री अकाल तख़्त साहिब अमृतसर में मीरी-पीरी दिवस पर…

आज मीरी-पीरी दिवस है, सिख भाईचारा इस दिवस को आज धूम धाम से मना रहा है। श्री अकाल तख़्त साहिब अमृतसर में मीरी-पीरी दिवस पर विशेष समागम आयोजित किये गए हैं। मीरी-पीरी दिवस का संबंध सिक्खों के छठे गुरु श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी से जुड़ा हुआ है। श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी ने आज के दिन दो किरपानों को पहन कर नई मिसाल पेश की थी। इन् दो किरपानों के नाम पर ही इस दिवस को मनाया जाता है।

यह दोनों किरपानें अत्याचार के खिलाफ लोगों को बचाने के लिए ही बनाई गईं। इन दोनों किरपानों का अपना ही अर्थ था, सिख धर्म में अहम विशेषता थी। मीरी की किरपान एक गुरु की ताकत को दर्शाती थी तो दूसरी ओर पीरी की किरपान आध्यात्मिकता का प्रतीक थी। इन दोनों किरपानों के साथ गुरु जी ने धर्म के मार्ग पर चलते हुए अधर्म का खात्मा करना सिखाया। गुरु जी ने अपने बहादुर सिक्खों को गतका, तलवार बाजी, घुड़सवारी, आदि सिखाए और इस काबिल बनाया कि जब भी कहीं अधर्म की लहर चले तो वे मीरी-पीरी के सिद्धांत को अपनाते हुए लोगों को अत्याचार मुक्त करा सकें।

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