Himachal Cabinet Meeting: हिमाचल में सुक्खू कैबिनेट की बैठक के बड़े फैसले- पंचायत आरक्षण नियमों में संशोधन, 15 जलविद्युत परियोजनाएं रद्द, जानिए बैठक के अहम फैसले

Himachal Cabinet Meeting: शिमला में मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में आज मंत्रिमंडल की बैठक हुई। इस बैठक में कई महत्त्वपूर्ण निर्णय लिए गए।…

Himachal Cabinet Meeting: हिमाचल में सुक्खू कैबिनेट की बैठक के बड़े फैसले- पंचायत आरक्षण नियमों में संशोधन, 15 जलविद्युत परियोजनाएं रद्द, जानिए बैठक के अहम फैसले

Himachal Cabinet Meeting:

शिमला में मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में आज मंत्रिमंडल की बैठक हुई। इस बैठक में कई महत्त्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में पंचायती राज व्यवस्था, सामाजिक सुरक्षा, ऊर्जा, शिक्षा, पुलिस प्रशासन और अन्य विकास कार्यों से जुड़े कई अहम फैसलों को (Himachal Cabinet Meeting) मंजूरी दी गई।

मंत्रिमंडल ने पंचायती राज (निर्वाचन) नियम, 1994 के नियम 28, 87, 88 और 89 में प्रस्तावित संशोधनों पर आम जनता से आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित करने का निर्णय लिया। प्रस्तावित संशोधन के अनुसार वर्ष 2010 को आधार वर्ष मानते हुए जो पंचायतें लगातार दो कार्यकाल तक आरक्षित रही हैं। उन्हें आगामी पंचायत चुनावों में आरक्षित नहीं किया जाएगा।

बैठक में सामाजिक सुरक्षा पेंशन नियम, 2010 में संशोधन को भी स्वीकृति दी गई। इसके तहत ‘निराश्रित’ शब्द को अधिक स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया।

मंत्रिमंडल ने स्वर्ण जयंती ऊर्जा नीति के अंतर्गत स्थानीय क्षेत्र विकास निधि का 40 प्रतिशत ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ को वित्तीय सहायता प्रदान करने का निर्णय लिया है। एकमुश्त माफी योजना का लाभ लेने के बावजूद समय पर कार्य शुरू न करने वाली 15 जलविद्युत परियोजनाओं को रद्द करने की स्वीकृति दी गई।

मंत्रिमंडल ने पंडोह में 10 मेगावाट क्षमता की लघु जलविद्युत परियोजना को भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) को इस शर्त पर आवंटित करने का निर्णय लिया कि बीबीएमबी उपयोग में न लाई गई भूमि राज्य सरकार को वापस करेगा। इस परियोजना से राज्य सरकार को 13 प्रतिशत मुफ्त बिजली तथा 5 प्रतिशत बिजली हिस्सेदारी के रूप में प्राप्त होगी।

बैठक में सिंगल विलेज स्कीम तथा मल्टी विलेज स्कीम के अंतर्गत गांवों में स्थापित अधोसंरचना के संचालन एवं रख-रखाव को ग्राम पंचायतों को सौंपने की स्वीकृति प्रदान की गई।

सिरमौर जिले में शिक्षा विभाग में कार्यरत अंशकालिक जल वाहकों, जिन्होंने 31 मार्च 2025 तक सात वर्ष अंशकालिक तथा चार वर्ष दैनिक वेतनभोगी के रूप में कुल 11 वर्ष की सेवा पूरी कर ली है, उनकी सेवाओं को नियमित करने का भी निर्णय लिया है।

चंडीगढ़-शिमला-चंडीगढ़ हेलीकॉप्टर टैक्सी सेवा को सप्ताह में तीन उड़ानों से बढ़ाकर 12 उड़ानें करने की स्वीकृति दी गई है। अब छह दिनों तक प्रतिदिन दो उड़ानें संचालित होंगी और इसके संचालन को सुचारु रखने के लिए राज्य सरकार द्वारा वायबिलिटी गैप फंडिंग प्रदान की जाएगी।

जल जीवन मिशन के अंतर्गत जल शक्ति विभाग में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों का वेतन राज्य सरकार के संसाधनों से जारी करने का निर्णय लिया। क्योंकि भारत सरकार द्वारा अभी तक इस मिशन के तहत धनराशि जारी नहीं की गई है।

तकनीकी शिक्षा विभाग के अंतर्गत विभिन्न सरकारी इंजीनियरिंग एवं फार्मेसी महाविद्यालयों में 60 कनिष्ठ सहायक प्रवक्ता के पद भरने को मंजूरी दी गई। सहकारिता विभाग में सहायक पंजीयक सहकारी समिति के दो पद तथा निरीक्षक सहकारी समिति के 30 पद भरने को भी स्वीकृति प्रदान की गई।

शिक्षा विभाग खेल छात्रावासों में कोच के 16 पद भरने का निर्णय भी लिया गया। जबकि सूचना एवं जनसंपर्क विभाग में जूनियर ऑफिस असिस्टेंट (आईटी) के तीन पद भरने को मंजूरी दी गई। हमीरपुर जिले के खरीड़ी स्थित खेल छात्रावास की क्षमता को बढ़ाकर 100 बिस्तर करने तथा इसे राज्य स्तरीय खेल उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है।

ऊना जिले के गगरेट में उप-मंडलीय पुलिस कार्यालय स्थापित करने तथा इसके लिए आवश्यक पद सृजित कर भरने की स्वीकृति दी गई।

शिमला के कोटखाई में नया केंद्रीय विद्यालय खोलने के लिए कोटखाई के मौजा कुफ्टू तथा जिला सिरमौर की तहसील पांवटा साहिब में उपलब्ध भूमि को शिक्षा मंत्रालय को हस्तांतरित करने का निर्णय लिया गया।

पुलिस जिला नूरपुर में पुलिस पोस्ट कोटला को पुलिस स्टेशन में स्तरोन्नत करने तथा ऊना जिले के टाहलीवाल स्थित फायर पोस्ट को उप अग्निशमन केंद्र में स्तरोन्नत कर आवश्यक पद सृजित करने की भी स्वीकृति दी।

बैठक में वर्ष 2016 में चयनित पटवारी पद के शेष सात अभ्यर्थियों को लाहौल-स्पीति और कुल्लू जिलों में रिक्त पदों के तहत नियुक्त करने का निर्णय लिया गया।

हिमुडा के पक्ष में 80 वर्ष की लीज प्रदान करने के लिए हिमाचल प्रदेश लीज नियम, 2013 के नियम 7 में संशोधन करने का निर्णय लिया गया। पहले राज्य सरकार 40 वर्ष से अधिक अवधि के लिए भूमि लीज पर नहीं दे सकती थी।

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