LIVING INDIA EXCLUSIVE : ‘सिस्टम की बाढ़’ में डूब रहे सैकड़ों बचपन

पठानकोट : मजबूरी समझिए या फिर भविष्य बनाने की जिद, आज पंजाब का भविष्य दूसरों के कंधों पर लटका हुआ है। ये सिस्टम की मार…

पठानकोट : मजबूरी समझिए या फिर भविष्य बनाने की जिद, आज पंजाब का भविष्य दूसरों के कंधों पर लटका हुआ है। ये सिस्टम की मार है या फिर शिक्षा का अलख। जो भी हो सिस्टम सैलाब में बह चुकी है। और बच्चे कंधों पर लटक कर दरिया पार कर रहे हैं ये बात तो साफ है। क्योंकि चिंता भविष्य की है। नहीं तो जिस दरिया में उफनता सैलाब जिंदगी लीलने के लिए चिंघार रही हो उसके पार जाना बच्चों का खेल तो कतई नहीं हो सकता है।

बात पंजाब की करें तो पठानकोट के हल्का भोआ के ब्लाक घरोटा में पड़ते गांव फ़रीदानगर के पास बहते खाल दरिया के कारण 40-50 गांवो का संपर्क टूटा। खाल दरिया में बाढ़ आने से ननिहालों की जिंदगी भी आई ख़तरे में छोटे-छोटे बच्चों को भी इसी दरिया से निकल कर जाना पड़ता है स्कूल। कभी भी इन बच्चों के साथ हो सकता है कोई बड़ा हादसा प्रसाशन व सरकार सोई हुई है कुंभकर्णी नींद में।

पठानकोट के हल्का भोआ के ब्लाक घरोटा में पड़ते गांव फ़रीदानगर के पास बहते खाल दरिया के कारण 40-50 गांवो का संपर्क आपस में इस दरिया में बाढ़ आने से टूट चूका है। बता दें कि इस दरिया के उस पार 40-50 के करीब गांव पड़ते हैं जो इसी दरिया को पार कर अपने कई निजी कामो के लिए आते जाते है यहां तक ही नहीं इन गांवों के बच्चे भी दरिया पार कर स्कूल आते हैं।

जानकारी के अनुसार यह दरिया जिस पर पहले तो किस्ती का सहारा लेकर लोगों को इस पार से उस पार पहुँचाया जाता था पर किस्ती बंद होने के बाद इस पर पलटून पुल का सहारा लिया गया था पर जैसे ही बरसात का मौसम आया इस दरिया में बाढ़ आ गई वह इस पुल को भी हटा दिया गया पर प्रसाशन का इस और कोई ध्यान नहीं गया कि नौनिहाल (छोटे-छोटे बच्चे) इस दरिया के पार स्कूल पड़ने के लिए जाते हैं।

प्रशासन व सरकार को क्या व कैसे भी जाएं, उनको क्या पर जब इस दरिया में बाढ़ आ गई है और यह स्कूली बच्चे अपनी जिंदगी दावं पर लगा पढ़ाई के लिए स्कूल जाते हैं तो हर वक्त इनमें एक खौफ बना रहता है कि कभी भी इनके साथ कोई बड़ा हादसा हो सकता है। आप देख सकते है इन तस्वीरों में की यह बच्चे किस तरह अपनी जिंदगी दाओ पर लगा इस दरिया को पार कर रहे है। इन बच्चों से जब मीडिया ने बात की तो उन्होंने बताया की वह क्या करें अगर स्कूल ना जाएं तो यहां उनकी पढ़ाई ख़राब होती है।

उधर इन गांवों के लोगों में भी इस बात को लेकर रोष पाया जा रहा है कि जब भी चुनाव आते हैं तो लीडर लोग आकर बड़े-बड़े वादे करते हैं। नेताजी कहते हैं कि हम आपकी इस मुश्किल को जल्द ख़त्म कर देंगे पर कुर्सी मिलते ही यह लोग सब कुछ भूल जाते हैं। लोगों को मूर्ख बनाकर सरकार बना लेते हैं और फिर आराम से सो जाते हैं। गांव वासियों ने भी सरकार से मांग किया है कि इस दरिया पर जल्द पक्का पुल बनाया जाए ताकि कोई बड़ी अन्होनी होने से रुक सके।

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