Gulf countries Meeting:
ईरान के साथ चल रहे जंग के बीच इजरायल ने मुसलमानों की सबसे पवित्र मस्जिदों में से एक अल-अक्सा मस्जिद को पिछले 16 दिनों से बंद कर रखा है. देशों ने ईरान के ख़िलाफ़ एक साझा बयान भी जारी किया और खाड़ी देशों पर तुरंत हमलों को रोकने की मांग की, जिसमें पाकिस्तान के विदेश मंत्री मोहम्मद इसहाक़ डार रियाद स्थित बैठक में मौजूद दिख रहे हैं. सऊदी अरब की राजधानी रियाद में 12 अरब और इस्लामी देशों के विदेश मंत्रियों ने एक अहम बैठक की. इसमें शामिल हुए देशों ने’ ईरान की ओर से खाड़ी देशों पर हो रहे हमलों’ की कड़ी निंदा की. इनकी ओर से जारी किए गए बयान में कहा गया, सभी देशों ने ईरान के उन हमलों की कड़ी निंदा की. जिनमें बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन का इस्तेमाल कर रिहायशी इलाक़ों, तेल संयंत्रों, वाटर प्लांट, हवाई अड्डों, मकानों और राजनयिक दफ़्तरों को निशाना बनाया गया. प्रतिनिधियों ने कहा कि ऐसे हमलों को किसी भी तरह से सही (Gulf Countries Meeting) नहीं ठहराया जा सकता.
संयुक्त बयान में कहा गया, प्रतिनिधियों ने ज़ोर दिया कि हर देश को आत्मरक्षा का अधिकार है. जैसा कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 में लिखा है. ईरान से तुरंत हमले रोकने की मांग की और कहा कि अंतरराष्ट्रीय क़ानून, मानवता के क़ानून और पड़ोसी देशों के साथ अच्छे रिश्तों का सम्मान करना ज़रूरी है.
उन्होंने कहा कि ईरान के साथ भविष्य के रिश्ते तभी बेहतर हो सकते हैं. जब वह दूसरे देशों की संप्रभुता का सम्मान करे और उनके आंतरिक मामलों में दख़ल न दे. इन देशों ने कहा, ईरान को अरब देशों में अपनी समर्थित मिलिशिया को मदद, पैसा और हथियार देना बंद करना चाहिए. ईरान को स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ में जहाज़ों की आवाजाही रोकने या बाब अल-मंदब में समुद्री सुरक्षा के लिए ख़तरा पैदा करने जैसी धमकियों से बचना चाहिए.
गौरतलब है कि ईरान के साउथ पार्स गैस फ़ील्ड पर हमले के बाद, ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका से जुड़ी तेल और गैस रिफ़ाइनरियों पर हमले किए. सऊदी अरब, क़तर, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात इन हमलों से प्रभावित हुए.
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