नई दिल्ली, 15 जुलाई
भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (CETA) बुधवार यानि कि आज से लागू हो गया। इसे भारत के सबसे बड़े मुक्त व्यापार समझौतों में से एक माना जा रहा है। सरकार का दावा है कि इससे किसानों, उद्योगों, निर्यातकों, स्टार्टअप और सेवा क्षेत्र को बड़े पैमाने पर लाभ मिलेगा, जबकि उपभोक्ताओं को कई आयातित उत्पाद सस्ते दामों पर उपलब्ध हो सकेंगे।
CETA के तहत भारत के करीब 99 प्रतिशत निर्यात को ब्रिटिश बाजार में शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी। वहीं ब्रिटेन से आने वाले कई उत्पादों पर आयात शुल्क चरणबद्ध तरीके से कम किया जाएगा। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को नई गति मिलने की उम्मीद है।
स्कॉच व्हिस्की और कारों पर बड़ा असर
इस समझौते के तहत स्कॉच व्हिस्की पर लगने वाला 150 प्रतिशत आयात शुल्क पहले चरण में घटकर 75 प्रतिशत हो जाएगा और अगले 10 वर्षों में इसे 40 प्रतिशत तक लाया जाएगा। इससे प्रीमियम विदेशी शराब की कीमतों में कमी आने की संभावना है।
ऑटो सेक्टर में भी बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। ब्रिटेन में बनी पूरी तरह तैयार कारों पर आयात शुल्क 110 प्रतिशत से घटाकर चरणबद्ध तरीके से 10 प्रतिशत किया जाएगा। पेट्रोल और डीजल कारों को शुरुआत से ही रियायत मिलेगी। ट्रकों पर शुल्क भी 44 प्रतिशत से घटाकर पांचवें वर्ष तक 8.8 प्रतिशत किया जाएगा।
IT पेशेवरों को राहत
समझौते के साथ लागू हुए डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन के तहत भारत से ब्रिटेन जाने वाले कर्मचारियों और उनके नियोक्ताओं को पांच वर्षों तक ब्रिटेन में सोशल सिक्योरिटी योगदान नहीं देना होगा। इससे IT और सेवा क्षेत्र की कंपनियों को बड़ी राहत मिलेगी।
इन उद्योगों को होगा फायदा
रेडीमेड गारमेंट, टेक्सटाइल, फुटवियर, कालीन उद्योग, प्रोसेस्ड फूड, अनाज, फल-सब्जियां, मसाले, समुद्री उत्पाद, ऑटोमोबाइल एवं ऑटो पार्ट्स, मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, सिरेमिक, ग्लास, सीमेंट और स्टोन उत्पाद जैसे क्षेत्रों को इस समझौते से बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।
ये उत्पाद हो सकते हैं सस्ते
ब्रिटेन से आयात होने वाले सैल्मन मछली, लैम्ब (भेड़ का मांस), मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद, चॉकलेट, सॉफ्ट ड्रिंक्स, कॉस्मेटिक्स, साबुन, परफ्यूम, शेविंग क्रीम और नेल पॉलिश जैसी वस्तुओं की कीमतों में कमी आ सकती है।
CETA को भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार, निवेश और रोजगार बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारतीय उद्योगों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के साथ-साथ दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई मजबूती देगा।

