मदद नहीं मिली तो परिवार का पालन करने के लिए सब्जी बेचने लगा नेशनल खिलाड़ी !

चरखी दादरी, 19 अगस्त । हरियाणा सरकार (haryana government) खेलों को बढ़ावा देने के लिए कईं प्रकार की घोषणाएं करने के साथ ही कईं नीतियां…

चरखी दादरी, 19 अगस्त । हरियाणा सरकार (haryana government) खेलों को बढ़ावा देने के लिए कईं प्रकार की घोषणाएं करने के साथ ही कईं नीतियां लागू कर चुकी है, लेकिन आज भी कईं खिलाड़ी ऐसे है, जो सरकारी मदद नहीं मिलने के कारण खेल छोड़ चुके है और परिवार का पालन करने के लिए उन्हें मजबूरी में कुछ ना कुछ काम करना पड़ रहा है। ऐसा ही एक शख्स है चरखी दादरी (charkhi dadri) के प्रेम नगर का दयाकिशन (daya kishan)। दयाकिशन ने स्कूल और कॉलेज के समय में एथलेटिक्स में खूब कामयाबी हासिल की। यूनिवर्सिटी (university) और नेशनल (national) के इंटर यूथ खेलों (inter youth sports) में पदक तक जीते। 2002 में यमुनानगर (yamunanagar) में हुई प्रतियोगिता में उन्होंने बेस्ट एथलीट का खिताब भी जीता, लेकिन इन सबके बावजूद उसे कोई सरकारी मदद नहीं मिली। इस पर पढ़ाई के बाद वो नौकरी की तलाश में लग गया। सरकारी नौकरी तो दूर किसी विभाग में उसे डीसी रेट पर भी नौकरी नहीं मिली। अब मजबूरी में परिवार को पालने के लिए दयाकिशन सब्जी मंडी में मासाखोर बनकर सब्जी बेचने का काम कर रहा है। दयाकिशन का दावा है कि यदि उसे अब भी कोई मदद मिल जाए तो वो भी अपने देश के लिए मेडल ला सकता है।

दयाकिशन के पास खेलों में जीते गए अनेक गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉंज मेडलों के साथ ही उसे मिले सर्टीफिकेट की भरमार है, लेकिन इतना सब होने के बावजूद आज तक किसी ने भी इसकी ओर कोई ध्यान नहीं दिया। ध्यान देने योग्य होगा कि खेलों को बढ़ावा देने के लिए हर संभव कोशिश में जुटे हरियाणा के खेल मंत्री अनिल विज क्या इस तरह के खिलाड़ियों के लिए भी कोई नीति बनाएंगे, जिससे वे भी अपने परिवार के साथ खुशहाली का जीवन जी सके।

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