भिवानी: कहते हैं पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं। कुछ ऐसा ही गांव बापोड़ा निवासी सौरव तंवर के साथ भी है। 17 साल के इस छात्र ने विदेशों में अपने जौहर दिखाते हुए कांस्य पदक झटका।
सौरभ तंवर महज 11 वीं क्लास में पढ़ता है लेकिन हौसले इतने बुलंद हैं कि ओलंपिक में देश के लिए मेडल लाने का सपना इस छात्र का है। दरअसल हाल ही में 23 से 30 जून तक फ्रांस में आयोजित आईएसएफ वर्ल्ड स्कूल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में इस खिलाड़ी ने शॉटपुट में कांस्य पदक हासिल किया। दूसरे नंबर पर आने वाले खिलाड़ी रजत पदक विजेता लाईचिन हाओ ने 79 अंक और सौरव ने 78 अंक प्राप्त किए और मामूली मार्जिन से ही रजत पदक से चूक गया।
ऐसा नहीं है कि सौरव, खेल की पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखता है बल्कि वह फौजी परिवार से है और उसके पिता फौजी हैं। सौरव के अनुसार उसने छह से आठ घंटे तक कड़ी मेहनत के बूते यह मुकाम पाया। अब उसका मकसद दूसरी अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक लाकर देश का नाम रौशन करना है। वह अपनी उपलब्धि का श्रेय अपने कोच प्रीतम और ओलंपियन शॉटपुट खिलाड़ी इंद्रजीत को देता है।
वहीं उसके कोच प्रीतम का कहना है कि सरकार की ओर से सुविधाएं खिलाडिय़ों को मिल रही हैं जबकि सौरव का कहना था कि स्टेडियम में उसे सुविधाएं नहीं मिल पाती। सौरव के मामा सुनील के अनुसार खिलाड़ी का मकसद ओलंपिक में देश का नाम चमकाना है। सौरव की इस उपलब्धि पर ग्रामीण खुश हैं और फौजियों के गांव बापोड़ा के इस खिलाड़ी की उपलब्धि पर हर कोई आशान्वित है कि वह भविष्य में होने वाली प्रतियोगिताओं में देश का नाम चमकाएगा।


