Haryana Gas Crisis:
सरकार कहती है- ‘पैनिक न हों गैस भरपूर है।’ प्रशासन कहता है- ‘स्टॉक की कमी नहीं है।’ लेकिन राजौंद की सड़कों पर आधी रात को बिछी ये कतारें कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं। यहाँ चूल्हा जलने की उम्मीद में लोग अपनी नींद कुर्बान कर रहे हैं। आलम यह है कि सूरज उगने से 10 घंटे पहले यानी रात 8 बजे ही लोग खाली सिलेंडर लेकर कुरुक्षेत्र के मैदान की तरह डट जाते हैं। शहर के गैस वितरण केंद्रों के बाहर का नजारा किसी मेले जैसा है, बस फर्क इतना है कि यहाँ उत्साह नहीं बेबसी है।
खाकी को संभालना पड़ता है मोर्चा
प्रशासन कहता है कि गैस की कमी नहीं है। तो जनता पलटकर पूछती है कि सुबह होते-होते कतारें इतनी लंबी हो जाती हैं कि खाकी पुलिस को मोर्चा संभालना पड़ता है फिर भी धक्का मुक्की कम नहीं होती। भीड़ और अव्यवस्था से तंग आकर अब वार्ड वासियों ने प्रशासन को आईना दिखाया है। लोगों की मांग है कि जिस वार्ड में गैस की गाड़ी आए वहां के स्थानीय लोगों को ही प्राथमिकता मिले। दूसरे वार्ड की भीड़ आने से अफरा-तफरी मचती है वार्ड वाइज लिस्ट बने टोकन सिस्टम लागू हो ताकि रात भर जागने की मजबूरी खत्म हो को शक है कि सिलेंडर पीछे के रास्ते से ऊंचे दामों पर बेचे जा रहे हैं।
भाषण नहीं भरा हुआ सिलेंडर चाहिए
क्या प्रशासन इसकी जांच करेगा अगर स्टॉक पूरा है तो डिमांड के हिसाब से गाड़ियां क्यों नहीं बढ़ाई जा रही प्रशासन के पास भीड़ प्रबंधन का कोई बैकअप प्लान क्यों नहीं है प्रशासन सिर्फ कागजों पर सप्लाई पूरी दिखा रहा है। अगर वार्ड के हिसाब से वितरण हो तो न भीड़ होगी और न ही कालाबाजारी की गुंजाइश रहेगी हमें भाषण नहीं भरा हुआ सिलेंडर चाहिए। राजौंद के परेशान उपभोक्ता
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