बॉलीवुड एक्टर रजा मुराद ने बोला सिंगर अदनान सामी पर हमला,CAA पर बोल दी ये बड़ी बात

ऑनलाइन डेस्क/लिविंग इंडिया न्यूज: बॉलीवुड के मशहूर एक्टर रजा मुराद ने नागरिकता संशोधन कानून यानी CAA पर पड़ा बयान दिया है, CAA पर बोलते हुए …

ऑनलाइन डेस्क/लिविंग इंडिया न्यूज: बॉलीवुड के मशहूर एक्टर रजा मुराद ने नागरिकता संशोधन कानून यानी CAA पर पड़ा बयान दिया है, CAA पर बोलते हुए  रजा मुराद ने कहा कि, अगर सिंगर अदनान सामी को देश की नागरिकता दे सकते हैं तो बाकी लोगों को भी क्यों नहीं दे सकते हैं। इस दौरान रजा ने कहा कि, ‘ये , CAA का कानून हमारे संविधान के विपरीत है, भारत सरकार को इस कानून को रोल बैक करना चाहिए, अगर भारत सरकार सिंगर अदनान सामी को देश की नागरिकता दे सकते हैं तो बाकी लोगों को भी क्यों नहीं दे सकते हैं। अदनान सामी के वालिद ने तो हमपर 1965 की जंग में बमबारी की थी, फिर भी उन्हें नागरिकता दे दी गई।

अदनान सामी को 2016 में भारतीय नागरिकता मिली

बतादें कि अदनान सामी को 2016 में भारतीय नागरिकता मिली थी, तो दूसरी तरफ नागरिकता संशोधन कानून यानी CAA पर अपना रिएक्शन देते हुए अदनान सामी ने हाल कि मुस्लिम समुदाय अब भी भारत की सिटिजनशिप के लिए अप्लाई कर सकता है। कानूनी तौर पर सभी का स्वागत है, मुस्लिम लोगों को अपने धर्म के चलते अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश में प्रताड़नाएं नहीं झेलनी पड़ रही हैं क्योंकि वे वहां बहुसंख्यक हैं CAA उन धर्म के लोगों के लिए है जिन्हें धर्मशासित देशों में प्रताड़ित किया जा रहा है।

CAA पर बोले बॉलीवुड कई सितारे

वहीं इससे पहले नागरिकता संशोधन कानून यानी CAA पर JNU में हुई हिंसा पर बॉलीवुड एक्टर खुराना, राजकुमार राव और विक्की कौशल ने कहा था कि, JNU में जो हिंसा हुई उसके लिए वह दुखी हैं। बता दें कि नागरिकता संशोधन कानून यानी CAA और NRC को लेकर पूरे देश में विरोध हो रहा है, बॉलीवुड के भी कई सितारे इस पर खुलकर अपना पक्ष रख रहे हैं।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बुलाई थी बैठक

वहीं इससे कल केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर और जनगणना के चरण 2021 पर चर्चा करने के लिए एक बैठक बुलाई इस बैठक में भारतीय जनता पार्टी बीजेपी द्वारा शासित कुछ राज्यों ने एनपीआर के कुछ पहलुओं पर आपत्ति जताई। और कुछ राज्यों ने एनपीआर का विरोध किया है, पश्चिम बंगाल और केरल ने कहा है कि वे अभ्यास में भाग नहीं लेंगे क्योंकि यह एक राष्ट्रव्यापी नागरिक रजिस्टर एनआरसी के लिए एक कदम है। राज्यों ने कहा है कि प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी एनआरसी और एक संशोधित नागरिकता कानून का संयोजन प्रकृति में विभाजनकारी है। इस दौरान गृह मंत्रालय कहा है कि एनपीआर का उद्देश्य सभी सामान्य निवासियों का एक व्यापक पहचान डेटाबेस तैयार करना है।

ममता ने कहा एनपीआर को ना

तो दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल सरकार ने कहा कि वह राज्य के मुख्य सचिवों और अन्य अधिकारियों के सम्मेलन में भाग नहीं ले रही है, एनपीआर के तौर-तरीकों पर चर्चा करने के लिए, केरल बैठक में शामिल हुआ और कहा कि राज्य ने कवायद शुरू कर दी है और यह प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है

राजस्थान ने जताई आपत्ति

वहीं राजस्थान के मुख्य सचिव डीबी गुप्ता ने कहा कि उन्होंने और कुछ अन्य राज्यों के प्रतिनिधियों ने एनपीआर अभ्यास के दौरान लोगों से कुछ सवाल पूछे जाने पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि, एनपीआर में कुछ प्रश्न अव्यावहारिक हैं, जैसे माता-पिता के जन्म स्थान से संबंधित प्रश्न। देश में ऐसे कई लोग हैं जो यह भी नहीं जानते कि उनका जन्म स्थान क्या था। मुझे नहीं पता कि इस तरह के सवालों का उद्देश्य क्या है और हमने बैठक में ऐसे सवालों को दूर करने के लिए कहा है।इस तरह के सवाल पहले भी पूछे जा चुके हैं, लेकिन अब व्यक्तिगत जन्म स्थान को उसके माता-पिता के जन्म स्थान से जोड़ने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि इस सवाल का जवाब अनिवार्य नहीं है।

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