US -Iran Peace Agreement:
ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते की घोषणा की गई है. इस पर ईरानी मीडिया के मुताबिक इसमें 14 बिंदुओं की जानकारी होने का दावा किया है. ईरान के अर्द्ध सरकारी समाचार एजेंसी मेहर न्यूज़ के मुताबिक़ प्रस्तावित बिंदुओं में लेबनान समेत सभी मोर्चों पर स्थायी युद्धविराम का मुद्दा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक प्रस्ताव के ज़रिए मंज़ूरी दी जाएगी. इसके बाद भारत के प्रधानमंत्री मोदी समेत जापान, ब्रिटेन, जर्मनी समेत अन्य देशों की प्रतिक्रिया सामने आई है.
प्रधानमंत्री मोदी ने समझौते का किया स्वागत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस शांति समझौते का स्वागत किया है. उन्होंने सोमवार को एक्स पर लिखा, मैं पश्चिम एशिया में संघर्ष समाप्त करने को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच बनी सहमति का स्वागत करता हूं. इस संघर्ष के कारण दुनियाभर में गंभीर आर्थिक अड़चन पैदा हुई और कई देशों में लोगों की जान गई. भारत को उम्मीद है कि इस सहमति के लागू होने से क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करने में मदद मिलेगी और नेविगेशन और व्यापार की आज़ादी सुनिश्चित होगी.
ई4 समूह ने क्या कहा?
इस समझौते पर ब्रिटेन, फ़्रांस, जर्मनी और इटली के नेताओं ने एक संयुक्त बयान जारी किया है. इन देशों के नेताओं ने कहा है कि वे अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय साझेदारों के साथ मिलकर इस “अवसर का पूरा लाभ उठाने” के लिए काम करेंगे. ई4 समूह के नाम से जाने जाने वाले इन देशों ने कहा, हम इस कूटनीतिक सफलता के लिए अमेरिका, ईरानी सरकार और इसमें शामिल सभी पक्षों को बधाई देते हैं, जिनमें पाकिस्तान, क़तर और अन्य सभी मध्यस्थ शामिल हैं.
यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस
यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर सहमति बनने की घोषणा का स्वागत किया है. उनके प्रवक्ता ने कहा, यह संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में एक अहम क़दम है.
जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकइची
जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकइची ने भी इस समझौते की सराहना की है. उन्होंने कहा, जापान को पूरी उम्मीद है कि स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ से सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित की जाएगी, और ईरान के परमाणु मुद्दे समेत अन्य मामलों पर अंतिम समझौता जल्द से जल्द किया जाएगा.
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि यह समझौता “मज़बूत और स्थायी शांति” की ओर ले जाएगा. न्यूज़ीलैंड के विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स ने इसे “निर्णायक और रचनात्मक समझौता” बताया. उन्होंने कहा कि यह “तनाव कम करने और उस क्षेत्र में स्थिरता को बढ़ावा देने की दिशा में एक क़दम है, जो वैश्विक आर्थिक सुरक्षा के लिए बेहद अहम है.”
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