न्यूज डेस्क/लिविंग इंडिया : हिमाचल की सीमा पर शिवालिक की पहाड़ियों में बसे त्रिलोकपुर गांव में बना मां बाला सुंदरी देवी मंदिर में नवरात्र को लेकर भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी है। हर दिन हजारों श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना कर रहे हैं। सुबह से ही पूजा का सिलसिला शुरू होता है जो देर रात तक जारी रहता है।
मंदिर में बजने वाली 81 घंटियों के अलावा माता के जयकारों से आसपास का इलाका भक्तिमय बना हुआ है। मां वैष्णो देवी के बाल स्वरूप के रूप में पूजी जाने वाली माता बाला सुंदरी के आशीर्वाद के लिए सालोंभर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है, लेकिन नवरात्रि के अवसर पर यहां की महत्ता ही काफी अलग होती है।
हरियाणा-हिमाचल की सीमा पर बने इस मंदिर की महत्ता काफी पौराणिक है। हरियाणा-हिमाचल के अलावा दूसरे राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना करने पहुंचते हैं। वहीं, श्रद्दालुओं को किसी तरह की दिक्कत ना हो, इसके लिए प्रशासन की तरफ से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
हालांकि, सितंबर के आखिरी महीने में यहां ठंड शुरू हो जाती है, जिस कारण मौसम भी काफी सुहावना बन गया है। बावजूद भक्तों का उत्साह थमने का नाम नहीं ले रहा। श्रद्धालुओं की मानें तो जो भी सच्चे मन से मां के दरबार में मन्नत मांगता है वह जरूर पूरी होती है। मां सभी की मनोकामना अवश्य पूरी करती हैं।
बताया जाता है 1573 में पिंडी स्वरूप में मां यहां आई थी। लालाराम दास नमक का व्यापार करते थे। एक दिन मां ने स्वप्न में उन्हें बताया कि उनका पिंडी स्वरूप नमक में आया है। इसलिए तुम्हारा नमक खत्म नहीं हो रहा। तुम मेरे मंदिर का निर्माण करो।
लेकिन लाला ने कहा कि मंदिर निर्माण के लिए काफी धन की जरूरत होगी, तब माता ने उस समय के राजा प्रदीप प्रकाश को स्वप्न में मंदिर निर्माण का आदेश दिया। आखिर में माता के भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया। आज भी हजारों श्रद्धालु मां बाला के दर्शन करने आते हैं।
