न्यूज डेस्क/लिविंग इंडिया : अमरीका के कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में बोलते हुए कांग्रेस उपाध्यक्ष ने भारत की मोदी सरकार को अर्थव्यवस्था के साथ ही हर मोर्चे पर असफल बताया। शायद पहली बार राहुल गांधी ने 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों पर अपना पक्ष रखा। कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा कि हिंसा ने उन्होंने दादी और पिता को खोया है।
इसलिए वो हिंसा को अच्छी तरह से समझते हैं। वो न्याय की लड़ाई में सिख दंगों के पीड़ितों के साथ हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि किसी के प्रति किए गए हिंसा की वो निंदा करते हैं।
सिखों को मदद पहुंचाने वाले पहले शख्स !
दरअसल कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में ‘India@70’ विषय पर बोलते हुए राहुल गांधी ने कहा कि वो सिख दंगा पीड़ितों की न्याय की लड़ाई में उनके साथ हैं। अहिंसा पर बोलते हुए कांग्रेस उपाध्यक्ष ने भारत में ध्रुवीकरण की राजनीति को खतरनाक बताया। साथ ही कहा कि वर्तमान में भारत में अहिंसा का सिद्धांत खतरे में है। अहिंसा ने भारत के लोगों के साथ मिलकर आगे बढ़ना सिखाया है। किसी के खिलाफ किसी तरह की हिंसा गलत है। वो सिख समुदाय की मदद के लिए तैयार हैं। अगर सिखों ने न्याय दिलाने में मदद मांगी तो वो ऐसा करने वाले पहले शख्स होंगे।
नोटबंदी के कारण GDP में दो फीसद की कमी
विमुद्रीकरण (Demonetisation) पर राहुल गांधी ने मोदी सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया। कहा कि नोटबंदी के बाद GST लागू करने से भारत की आर्थिक गति को काफी हद तक धीमा कर दिया। 500 और 1000 रूपये के नोट को अचानक बंद करने के कारण ही भारत की GDP (Gross Domestic Product) में दो प्रतिशत से ज्यादा की कमी आ गई। नोटबंदी के कारण बाजार से करीब 86% कैश प्रचलन से बाहर हो गए। इसने भारतीय अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है।
मोदी सरकार में बिगड़े घाटी के हालत
इसके अलावा राहुल गांधी ने कश्मीर मुद्दे पर भी अपने विचार रखे। राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस (UPA) सरकार में कश्मीर में हिंसा में काफी कमी आई थी। उन्होंने इसके लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की तारीफ भी की थी। लेकिन मोदी सरकार ने जम्मू और कश्मीर में आतंकवादियों के लिए जगह दे दिया। घाटी में पीडीपी और भाजपा की सरकार को आतंकवाद से निपटने में सफलता नहीं मिल रही है। मोदी सरकार में जम्मू और कश्मीर में हिंसा में काफी बढ़ोत्तरी हुई है।
सज्जन, टाइटलर, कमलनाथ को करें बाहर : पीड़ित
सिख दंगा पीड़ितों पर राहुल गांधी के बयान पर राजनीति भी शुरू हो गई है। दूसरी तरफ दंगा पीड़ित राहुल गांधी के बयान से इत्तेफाक नहीं रखते हैं। दिल्ली में रह रहे 1984 सिख विरोधी दंगा के पीड़ितों ने कहा है कि राहुल गांधी अगर सही मायनों में उनके साथ हैं और उन्हें न्याय दिलाना चाहते हैं तो सबसे पहले सज्जन कुमार, जगदीश टाइटलर और कमलनाथ को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाएं। हजारों सिखों का कत्ल कर दिया गया और करीब 33 साल बाद राहुल गांधी न्याय दिलाने की बात कह रहे हैं, जिस पर उन्हें भरोसा नहीं है।



