महज 11 साल की उम्र में प्रोफेशनल गायकी की शुरुआत करके वो उस आकाश पर छा गया, जिस पर ख्वाहिशों के साथ टंगना और वो भी चांद की तरह मुश्किल ही नहीं नामुमकिन भी है। नामुमकिन इसलिए भी कि, जब देश में श्वेत के वर्चस्व के बीच अश्वेतों की हक और आवाज दबाने की पुरजोर कोशिश हो। लेकिन, उस शख्स ने अपने बिजली से कौंधते जिस्म और गायकी से एक शानदार सफर शुरू किया जो आज भी जारी है।

“जैक्सन 5” के सदस्य के रूप में वो शख्स था तो बच्चा, लेकिन चांद पर चलने का उसका सफर जारी रहा, जैसे बर्फ पर कोई शख्स फिसलता है, और जैसे मक्खन में छुरी चल रही है। ये दिखने में आसान है, लेकिन उस शख्स के लिए बहुत मुश्किल था, जिसके लिए जिंदगी “लार्जर दैन लाइफ” इमेज के ठीक समानान्तर चलती है। कभी-कभी ये इमेज टूटने की हद तक महसूस की जाती है, लेकिन अमावस की चांद के बाद जैसे पूर्णिमा आता है, ठीक उसी तरह उस शख्स की मेहनत फिर से चमकने लगती है।

और वो शख्स उस चांद पर चलने का माद्दा भी रखता है, जिसे हम नंगी आंखों से देखकर बस खुश होना जानते हैं, क्योंकि हमने उस चांद को तो देख लिया, लेकिन उसके संघर्ष को समझने की जुर्रत कभी नहीं कीl बस, हम अपने उस प्यारे शख्स को एक नाम जरूर देते हैं, “किंग ऑफ पॉप” का। हां, वो शख्स है माइकल जोसेफ जैक्सन, जिसके गीत-नृत्य से ज्यादा चर्चा उसके “सेक्स स्कैंडल” की रही। लेकिन तमाम आरोपों को दरकिनार कर हमारा माइकल आज भी चांद पर चहलकदमी करता मिल जाएगा।
माइकल थे तो अमरीकी, लेकिन पॉप गायकी, और नृत्य की नई विद्या सृजन कर वे ध्रुवतारा बन गए हैं, जो आज भी वैश्विक संगीत के आकाश पर आपको दिखाई पड़ जाएगा। ऑफ द वाल (1979), बैड (1987), डैंजरस (1991), हिस्ट्री एलबम (1995) से माइकल ने वो मुकाम हासिल किया, जिसकी कल्पना ही की जा सकती है। वहीं, 1972 में जारी किया गया उनका एलबम “थ्रिलर” अब तक सबसे अधिक बिकने वाला एलबम माना जाता है।

माइकल ने अपनी जिंदगी में तमाम पहल किए, रंगभेद मिटाने के लिए “ब्लैक एंड व्हाइट” से सनसनी फैला दी। “दे डोंट केयर अबाउट अस” भी इसी कड़ी का हिस्सा है। “स्क्रीम” को भी आप कैसे भूल सकते हैं। ये माइकल की सफलता नहीं थी, बल्कि उसके चाहने वालों का प्यार था, जिन्होंने “बैड” शब्द को भी स्टेटस सिंबल बना दिया। माइकल एलबम के कवर और टीवी से बाहर निकलकर घरों की दीवारों, लड़कियों की डायरी, लड़कों के होठों के साथ ही गांव के सैलून की दीवारों पर भी टंग गए।
माइकल ना जाने कई बार गिनीज रिकॉर्ड में शामिल हुए और 13 ग्रैमी अवार्ड अपने नाम किया, ये रिकॉर्ड सिर्फ माइकल ही बना सकते हैं। साल 2009 में माइकल अपने आखिरी वर्ल्ड टूर “दिस इज इट” की तैयारियों में जुटे तो थे, पर यह सपना अधूरा ही रह गया। 1997 में म्यूनिख में स्टेज शो करते हुए माइकल ने जब अपना “सिग्नेचर स्टेप” “मूनवॉक” किया तो कई दर्शक गमगीन हो गए थे। शायद वो अपने आंसुओं से स्टेज को फिसलन भरा बनाना चाह रहे थे ताकि माइकल को दिक्कत ना हो।

माइकल के बारे में जितना लिखा या पढ़ा गया है, अफसोस उस शख्स के बारे में उससे ज्यादा बोला गया। 25 जून 2009 को हमारा नायक माइकल जैक्सन तमाम तर्क-कुतर्क, पक्ष-विपक्ष, खुशी-गम को पीछे छोड़ अपने घर चांद पर चला गया। लेकिन, आज भी पूर्णिमा की रात में माइकल चांद पर “मूनवॉक” करता मिल जाएगा, बस आंख बंद करके गुनगुनाना होगा आपको, “दे डोंट केयर अबाउट अस।”
अलविदा माइकल, लेकिन चांद पर हमेशा “मूनवॉक” करते रहना।
(ये लेखक के अपने विचार हैं।)
