ऑनलाइन डेस्क/लिविंग इंडिया न्यूज:- राखी का त्यौहार भाई और बहन के प्यार का प्रतीक माना जाता है। इस दिन बहने अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर उनकी लम्बी आयु की कामना करती हैं और भाई पूरे जीवनभर अपनी बहन की रक्षा करने का वादा करते हैं। आज पूरे देश के लिए ये खुशी दोगुनी हो गई है क्योंकि आज 15 अगस्त है। देश आजाद होने की खुशी का जहां सभी जश्न मना रहे हैं, वहीं, राखी के त्यौहार से सभी बहनों की आंखों में चमक नजर आ रही है।
ज्योतिषों के अनुसार इस बार भद्रा नहीं है, तो सभी बहने पूरे दिन में किसी भी समय अपने भाई को राखी बांध सकती हैं। क्योंकि राखी बांधने के लिए आज का पूरा दिन ही शुभ रहेगा। लेकिन अगर 1 बजकर 43 मिनट से 4 बजकर 20 मिनट के बीच राखी बांधी जाए, तो इसका विशेष फल भी मिलेगा।
इस बार सावन के महीने में 15 अगस्त के दिन चंद्र प्रधान श्रवण नक्षत्र में स्वतंत्रता दिवस और रक्षाबंधन का संयोग एक साथ बन रहा है और 19 साल बाद फिर से एक बार स्वतंत्रता दिवस और रक्षाबंधन मनाया जा रहा है। इस बार बहनों को भाई की कलाई पर प्यार की डोर बांधने के लिए मुहूर्त का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
रक्षा बंधन के 4 दिन पहले ही गुरु मार्गी होकर सीधी चाल चलने लगेंगे। श्रवण नक्षत्र, सौभाग्य योग, सूर्य कर्क राशि में और चंद्रमा मकर राशि में होंगे। ये सभी शुभ संयोग मिलकर इस बार रक्षाबंधन को बेहद खास बना रहे हैं। इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा का न होना भी इसे काफी अच्छी माना जा रहा है क्योंकि मान्यता के अनुसार रावण की बहन ने भद्राकाल में ही अपने भाई की कलाई में रक्षासूत्र बांधा था, जिसके कारण ही रावण का सर्वनाश हुआ था और इस बार रक्षाबंधन पर भद्राकाल नहीं रहेगा।
हर साल की तरह बाजारों में भी राखियां धड़ल्ले से बिक रही है। सभी बाजार राखी के त्यौहार पर सजाए गए हैं और अलग-अलग डिजाइन की बेहद सुंदर राखियां बाजारों में देखने को मिल रही हैं। इस बार खास बात तो ये भी है कि अब नेताओं के चेहरों वाली राखियां भी बाजार में काफी चर्चा में हैं। पीएम नरेंद्र मोदी के चेहरे वाली पतंग और मोदी टैटू के बाद अब राखी पर भी मोदी का चेहरा लगाकर मार्केट में ये राखियां बेची जा रही हैं। बच्चों के लिए भी पीएम मोदी के चहरे की एनिमेटिड राखियां बनाई गई हैं, जो कि स्पेशली बच्चों के लिए बनाई गई हैं।
क्यों मनाया जाता है राखी का त्यौहार-
ऐसी मान्यता है कि श्रावणी पूर्णिमा या संक्रांति तिथि को राखी बांधने से बुरे ग्रह कटते हैं। श्रावण की अधिष्ठात्री देवी द्वार ग्रह दृष्टि-निवारण के लिए महर्षि दुर्वासा ने रक्षाबंधन का विधान किया था।
इसके अलावा ये भी कथा बहुत प्रचलित है कि इस दिन इंद्राणी ने इंद्र को रक्षा सूत्र बांधा था। कहा जाता है कि एक बार देवों और दैत्यों में 12 साल तक युद्ध रोक देने का निश्चय किया, लेकिन इंद्र की पत्नी इंद्राणी ने पति की रक्षा और विजय के लिए उनके हाथ में वैदिक मंत्रों से अभिमंत्रित रक्षा सूत्र बांधा। इसके बाद इंद्र के साथ सभी देवता विजयी हुए। तभी से इस पर्व को रक्षा के प्रतीक रूप में भी मनाया जाता है और भाई- बहन के लिए ही रक्षाबंधन त्यौहार इसलिए बनाया जाता है क्योंकि एक भाई से ज्यादा बहन की रक्षा और कौन कर सकता है।
तो इतिहास में भी राखी के त्यौहर की एक बड़ी अहमियत मानी जाती थी। बताया जाता है कि मेवाड़ की महारानी कर्मावती ने मुगल राजा हुमायूं को राखी भेजकर रक्षा-याचना की थी। हुमायूं ने भी राखी की लाज रखी।इसके अलावा सिकंदर की पत्नी ने पति के हिंदू शत्रु पुरू को राखी बांधकर उसे अपना भाई बनाया था और युद्ध के समय सिकंदर को न मारने का वचन लिया था। पुरू ने युद्ध के दौरान हाथ में बंधी राखी का और अपनी बहन को दिए हुए वचन का सम्मान करते हुए सिकंदर को जीवनदान दिया था। तो वहीं,राखी के लिए महाराजा राजसिंह ने रूपनगर की राजकुमारी का उद्धार कर औरंगजेब के छक्के छुड़ाए थे। महाभारत में भी विभिन्न प्रसंग रक्षाबंधन के पर्व के संबंध में उल्लिखित हैं।





